उत्तराखण्डकुमाऊं,

बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम पर भाजपा-इंडिया गठबंधन से सीधे सवाल! 23 अक्टूबर को लालकुआं में होगा ‘राजनीतिक दल जवाब दो’ कार्यक्रम

लालकुआं न्यूज़- बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन का अनिश्चितकालीन धरना 17वें दिन भी जारी रहा। इस बीच संगठन ने भाजपा सरकार और इंडिया गठबंधन पर राजस्व ग्राम से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। संगठन ने दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय पदाधिकारियों को खुला पत्र भेजकर 23 अक्टूबर को लालकुआं तहसील परिसर में आयोजित ‘राजनीतिक दल जवाब दो’ कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है।

 

 

 

इधर, रावत नगर ग्रामसभा ने राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने और गौला नदी पर तटबंध निर्माण की मांग को लेकर तहसीलदार ईश्वर सिंह भीमा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ग्रामीणों ने दोनों मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की।

 

 

23 अक्टूबर को होगा ‘राजनीतिक दल जवाब दो’ कार्यक्रम

वन अधिकार संगठन ने भाजपा सरकार और इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के साथ ही स्थानीय अध्यक्षों को भेजे खुले पत्र में राजस्व ग्राम की अधिसूचना में हो रही देरी पर जवाब मांगा है। संगठन ने दोनों पक्षों से अपने-अपने प्रस्तावित रास्तों का कानूनी आधार स्पष्ट करने और खुले मंच पर जनता के सवालों का जवाब देने की मांग की है।

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संगठन का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत बिंदुखत्ता का दावा 19 जून 2024 को स्वीकृत होकर शासन को भेजा गया था। इसके बावजूद अब तक राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। संगठन ने सवाल उठाया कि दावा स्वीकृत होने के बाद भी अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ रही है।

 

 

सुप्रीम कोर्ट में पत्रावली भेजने पर उठाए सवाल

वन अधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वन अधिकार अधिनियम के तहत आगे बढ़ी प्रक्रिया के बावजूद पत्रावली सुप्रीम कोर्ट भेजने की बात कर रही है। वहीं, इंडिया गठबंधन वन भूमि के अनारक्षण की मांग को लेकर समानांतर आंदोलन चला रहा है।

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संगठन का तर्क है कि जब वन अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, तो दूसरे विकल्पों की पैरवी से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और मूल आंदोलन कमजोर पड़ सकता है।

 

 

खुले पत्र में भाजपा से पूछा गया है कि स्वीकृत दावे के बावजूद अधिसूचना जारी क्यों नहीं हुई, पत्रावली सुप्रीम कोर्ट भेजने का आधार क्या है और इस कदम के संभावित परिणामों की जिम्मेदारी कौन लेगा।

 

 

वहीं, इंडिया गठबंधन से वन अधिकार अधिनियम के तहत चल रही प्रक्रिया के बजाय वन भूमि के अनारक्षण की मांग करने का कारण स्पष्ट करने को कहा गया है। संगठन ने केंद्र सरकार को पत्रावली भेजने के इस विकल्प की वैधानिक स्थिति पर भी जवाब मांगा है।

 

 

32 गांवों की मांग पर अब जवाब का इंतजार

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। वन अधिकार संगठन अधिसूचना जारी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है। संगठन ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे आरोप-प्रत्यारोप के बजाय कानूनी प्रावधानों और अपनी रणनीति को जनता के सामने स्पष्ट करें।

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धरनास्थल पर संगठन ने दोहराया कि उसका मुख्य उद्देश्य बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए अधिसूचना जारी करवाना है। अब सभी की नजरें 23 अक्टूबर को होने वाले ‘राजनीतिक दल जवाब दो’ कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां संगठन दोनों पक्षों से सीधे जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है।

 

 

धरने में ये लोग रहे शामिल

अनिश्चितकालीन धरने में संयोजक त्रिलोक सिंह राणा, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, रमेश गोस्वामी, श्याम सिंह रावत, ममता बिष्ट, दौलत सिंह कोरंगा, दीपक जोशी, बसंत पांडे, गोविंद गिरी, भूपाल सिंह रावत, पुष्कर भंडारी, जीवन पांडे, दीप कर्नाटक, मंगल सिंह कोश्यारी, लीला देवी, गीता देवी और कैलाश मेहता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।