उत्तराखंड में UCC के नियमों में बड़ा बदलाव! विवाह प्रमाणपत्र में गलत नाम अब हो सकेगा ठीक, लिव-इन को लेकर भी अहम फैसला

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं। अब विवाह पंजीकरण के दौरान दर्ज नाम में गलती होने या नाम अधूरा रहने पर उसे ठीक कराने का रास्ता खुल गया है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। धामी कैबिनेट ने गृह विभाग की समान नागरिक संहिता नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण, रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियों और दंड संबंधी प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं।
विवाह पंजीकरण में गलत नाम की समस्या होगी दूर
उत्तराखंड में जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता लागू है। इसके तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। हालांकि, पहले विवाह पंजीकरण के दौरान दर्ज नाम में गलती होने या नाम अधूरा रह जाने पर उसे बदलने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते लोगों को अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने और उनमें नाम का मिलान कराने में परेशानी होती थी।
अब नियमावली में संशोधन के बाद संबंधित रजिस्ट्रार को विवाह पंजीकरण रद्द करने और दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार दिया गया है। यदि किसी व्यक्ति के विवाह प्रमाणपत्र में नाम गलत दर्ज है, तो वह आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुराना पंजीकरण रद्द होने के बाद नए सिरे से विवाह का पंजीकरण कराया जा सकेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों में भी बदलाव
कैबिनेट ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई महिला पहले लिव-इन संबंध के दौरान गर्भवती हो जाती है और बाद में वह संबंध समाप्त कर दूसरा संबंध बनाती है, तो उसे पहले संबंध से जुड़ी इस जानकारी की सूचना नए साथी और पुलिस को देने की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी।
पहले के प्रावधान में दूसरे संबंध में जाने पर संबंधित व्यक्ति और पुलिस को जानकारी देने की व्यवस्था थी। संशोधन का उद्देश्य इस प्रक्रिया से जुड़ी अनिवार्यता में बदलाव करना है।
रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी और कानूनी धाराओं में भी संशोधन
नियमावली में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। अब रजिस्ट्रार का दायित्व सचिव के स्थान पर अपर सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपने का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही नियमावली में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं को शामिल किया गया है। वहीं, दंड से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव करते हुए कुछ स्थानों पर ‘दंड’ के स्थान पर ‘शास्ति’ यानी पेनाल्टी या जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
इन संशोधनों से विवाह प्रमाणपत्र में नाम की गलती के कारण परेशान लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया में बदलाव से यूसीसी के तहत पंजीकरण व्यवस्था में भी संशोधन होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इन बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।










