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उत्तराखंड- अब गाड़ी चलाने वाले लोग ध्यान दें, अब नए नियमों से चलाना होगा अपना वाहन, वरना आपको पड़ेगा महंगा

उत्तराखंड में मार्च की शुरुआत के साथ परिवहन विभाग के नए नियम भी लागू हो जाएंगे, जिसके बाद स्कूल बस, टैक्सी, मैक्स, ऑटो और मालवाहक वाहनों को नए नियमों के तहत चलना होगा। ऐसा न होने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन विभाग ने बीती नौ जनवरी को हुई आरटीए की बैठक में करीब 10 मुद्दों पर सहमति दी थी, जिसके बाद बीती 2 फरवरी को संभागीय परिवहन प्राधिकरण हल्द्वानी ने इस संबंध में विज्ञप्ति जारी कर एक महीने बाद इन नए नियमों को लागू किए जाने की बात कही थी। 2 मार्च को एक महीना बीतने पर परिवहन विभाग के 9 नए नियम लागू होने जा रहे हैं। इससे हल्द्वानी संभाग में पंजीकृत टैक्सी-मैक्स वाहनों को अब अपना लगेज कैरियर बदलना होगा। इसके लिए मार्च के पहले हफ्ते से परिवहन विभाग कार्रवाई शुरू करने जा रहा है। वहीं कुमाऊं संभाग के पर्वतीय क्षेत्र में अब मालवाहक वाहन 90 क्विंटल के बजाय आरसी के अनुसार भार ले जा सकेंगे।

आरटीए की बैठक में हल्द्वानी संभाग में चल रहे ऑटो के लिए 16 किमी क्षेत्र के दायरे में चलने का नियम लागू किया है। अब ऑटो नैनीताल रोड पर भुजियाघाट तो रामनगर में गर्जिया मंदिर तक नहीं जाएंगे। इसके साथ ही परमिट के अनुसार शहर के केंद्र से नगर निगम, नगर पालिका सीमा के बाहर ऑटो का संचालन नहीं किया जा सकेगा। इसी तरह रुद्रपुर से किच्छा या गदरपुर के बीच चल रहे ऑटो भी अब नहीं चलाए जा सकेंगे।

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स्कूलों को अब स्कूल बसों में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा। संचालन के लिए ट्रांसपोर्ट मैनेजर को नियुक्त करना होगा। इसके साथ ही चालक और परिचालक का भी सत्यापन करवाना होगा। वहीं स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बीएस-5 और बीएस 6-बसों की इलेक्टि्रक वायरिंग की हर साल जांच करवानी होगी। दरअसल बीते साल शहर में स्कूल बसों में आग लगने की घटना के बाद परिवहन विभाग ने यह नियम लागू किया है।

कॉर्बेट पार्क की सीमा से बाहर पवलगढ़ और सीतावनी में हर साल सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। मगर यहां सफारी सुविधा नहीं थी। आरटीए बैठक में परिवहन विभाग ने पवलगढ़ और सीतावनी के लिए भी परमिट जारी करने का फैसला लिया था। इससे पर्यटक सीजन में दोनों जगह के लिए सफारी शुरू हो जाएगी।

आरटीए में मंजूर किए गए नियम मार्च के प्रथम सप्ताह से लागू हो जाएंगे। टैक्सियों में लगेज कैरियर की छूट दी गई, जिसके लिए परिवहन विभाग के प्रारुप तैयार करवाया गया है। साथ ही स्कूल बसों के परमिट नियम सहित अन्य नियम भी लागू होंगे। -संदीप सैनी, आरटीओ हल्द्वानी संभाग।

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कॉमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने पर ही टैक्स छूट का लाभ वाहन स्वामी को मिल सकेगा। इसके लिए रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर से प्रमाणपत्र भी लेना होगा, जिसके बाद पंजीकरण कैंसिल होगा और परिवहन विभाग में खाता बंद कर दिया जाएगा।

परिवहन विभाग में पंजीकृत कई पुराने कॉमर्शियल वाहन को टैक्स जमा करना होता है। बस का टैक्स हर महीने तो मालवाहक और टैक्सी मैक्स का टैक्स हर तीन महीने में जमा किया जाता है। मगर कई ऐसे वाहन भी हैं जो अब सड़क पर नहीं चल रहे हैं। वहीं इन वाहनों का टैक्स भी वाहन स्वामी जमा नहीं कर रहे, जिस कारण पेनाल्टी भी बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल नहीं कराया है। ऐसे वाहन मालिकों के लिए शासन ने टैक्स छूट का प्रावधान किया है। मगर इसके लिए वाहन स्वामी को अपने वाहन का रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर से सर्टिफिकेट लाना होगा, जिसमें वाहन को स्क्रैप के लिए दिए जाने की सहमति दर्ज होगी, तभी रजिस्ट्रेशन कैंसिल होगा।

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि जो वाहन स्वामी अपनी गाड़ी का पंजीकरण निरस्त करवाना चाहते हैं, लेकिन टैक्स और पेनाल्टी ज्यादा होने कारण नहीं करा पाते हैं, उन्हें यह छूट दी है।

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जानकारी के अनुसार, प्रदेश में रुड़की में दो रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर हैं, जबकि नैनीताल जिले के लिए सबसे नजदीक स्क्रैपिंग सेंटर उत्तर प्रदेश के बिलासपुर और बहेड़ी में हैं, जहां से वाहन स्वामी वाहन स्क्रैपिंग का प्रमाणपत्र ले सकते हैं। परिवहन विभाग के अनुसार वाहन स्वामी को रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने और टैक्स छूट के लिए आरटीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके बाद 20 दिन के भीतर स्क्रैपिंग प्रमाणपत्र जमा करना होगा। इसके बाद ही वाहन का रजिस्ट्रेशन कैंसिल होगा और खाता बंद किया जा सकेगा।

टैक्स छूट के लिए तीन स्तर बनाए गए हैं। जितना पुराना वाहन होगा टैक्स और पेनाल्टी में छूट भी उसी के अनुसार मिलेगी। 2003 से पहले रजिस्टर्ड वाहनों को टैक्स में 100 फीसदी छूट मिलेगी, जबकि 2008 के बाद रजिस्टर्ड वाहन के टैक्स पर कोई छूट नहीं मिल सकेगी।


2003 से पहले रजिस्टर्ड वाहन – टैक्स और पेनाल्टी में 100 फीसदी छूट।
2003 से 2008 के बीच रजिस्टर्ड वाहन- टैक्स में 50 प्रतिशत और पेनाल्टी में 100 फीसदी छूट।
2008 के बाद रजिस्टर्ड वाहन- सिर्फ पेनाल्टी में 100 फीसदी छूट।