उत्तराखण्डकुमाऊं,

How to Test Kuttu Atta at Home: कुट्टू का आटा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, परोसने से पहले ऐसे करें चेक

देहरादून न्यूज- उत्तराखंड में कुट्टू के आटे से फूड प्वाइजनिंग की ये कोई पहली घटना नहीं है। न केवल दून बल्कि रुड़की, हरिद्वार, ऋषिकेश से लेकर कुमाऊं में भी कुट्टू के आटे ने बीते वर्षों में कई लोगों की सेहत बिगाड़ी है। बावजूद इसके संबंधित विभाग और जिला प्रशासन नवरात्र से पहले नियमित रूप से सघन सैंपलिंग नहीं करता। इस बार भी ऐसा ही हुआ है।

 

 

दून में फूड प्वाइजनिंग की घटना के बाद सैंपलिंग शुरू की गई है। जानकारों के मुताबिक, कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी और पकौड़ी खाकर बीमार पड़ने की एक वजह यह हो सकती है कि आटा एक्सपायर्ड या इसमें कोई बैक्टीरिया अथवा फंगस हो। कुट्टू के आटे की शेल्फ लाइफ भी बहुत कम होती है।

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ताजे आटे का रंग गहरा भूरा बाजार में मिलने वाला कुट्टू का आटा पुराना है या ताजा, इसकी पहचान उसके रंग से की जाती है। ताजा आटे का रंग गहरा भूरा होता है।

 

 

कुट्टू के आटे में किसी तरह की मिलावट करने या खराब हो जाने पर उसका रंग बदल जाता है। मिलावटी या खराब कुट्टू के आटे का रंग ग्रे या हल्का हरा नजर आने लगता है। साथ ही यह आटा गूंथने पर बिखरने लगता है।

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एफ्लाटाक्सिन तो नहीं वजह…

उत्तर प्रदेश में कूट्टू के आटे में मानव उपभोग के लिए असुरक्षित एफ्लाटाक्सिन की भी पुष्टि हो चुकी है। आमतौर पर यह सड़ी मूंगफली में पाया जाता है। मूंगफली खाने के दौरान अचानक ही किसी दाने में पूरे मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। वह इसी एफ्लाटाक्सिन की वजह से होता है।

 

 

कुटू के आटे में यह नहीं पाया जाता है। आटे में सड़ी मूंगफली को पीसकर मिलाया गया हो तो उसमें एफ्लाटाक्सिन हो सकता है। जो लिवर के लिए हानिकारक है।

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कई बार लंबे समय तक गलत तरीके से स्टोर किए जाने या एक्सपायर हो जाने के चलते कुट्टू का आटा खराब हो जाता है। इसमें फंगल या अन्य तरीके का संक्रमण विकसित हो जाता है और इसे खाकर लोग बीमार पड़ जाते हैं। पुराना, नमी वाला और मिलावटी कुट्टू सेहत को नुकसान पहुंचाता है। कुट्टू गर्म भी होता है। इस मौसम में इसके स्थान पर व्रत में अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें तो बेहतर है। -डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ