एलबीएस में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ज्ञानवर्धक कार्यशाला का महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र छात्राओं ने लिया लाभ

लालकुआं न्यूज- लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय हल्दुचौड में वर्तमान परिदृश्य में प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय कार्यशाला में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति समेत उत्तराखंड के तमाम शिक्षाविदों ने तमाम ज्ञान परंपराओं को समझते हुए देश के विकास में सक्रिय योगदान देने की बात कही।
कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दीवान सिंह रावत ने कहा कि जब तक हम अपनी ज्ञान परंपरा को नहीं जानेंगे तब तक हमारा विकास संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने भारतीय वेदों की महत्ता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। डॉ विपिन चंद्र जोशी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उपलब्धियां पर विस्तार पूर्वक चर्चा की।
विशिष्ट अतिथि प्रवीण रामदास ने विगत शिक्षा आयोग द्वारा किस प्रकार भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान की अनदेखी की गई इसके बारे में विस्तृत पूर्वक जानकारी दी बाजपुर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर के के पांडे ने भारतीय वेदों और उनकी प्रासंगिकता पर बोल दिया गढ़वाल विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर हेमवती नंदन पांडे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा द्विपक्षीय रही है जो ज्ञान विज्ञान के साथ-साथ मानव कल्याण पर बल देती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही उत्तराखंड उच्च शिक्षा निदेशक प्रोफेसर अंजू अग्रवाल ने कहा कि भारत आज भी ज्ञान का केंद्र है और प्राचीन काल से ही भारत विश्व गुरु की राह में अग्रसर है। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम की आयोजक डॉक्टर पूनम म्यान, डॉ सुरेंद्र सिंह पडियार, डॉ आशीष रतूड़ी, एरीज नैनीताल से आए डॉ नरेंद्र सिंह, डॉ तारा भट्ट, डॉ अरुण चतुर्वेदी, प्रोफेसर राजकुमार सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये।
इस दौरान एरीज के वैज्ञानिक तथा भारत के अन्य राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों से आये प्रोफेसरों ने ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान बांटा।
