उत्तराखंड में बनेगा देश का पहला अग्निवीर रोजगार सेल, पहले बैच की वापसी से पहले होगी पूरी तैयारी

उत्तराखंड सरकार अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राज्य में देश का पहला अग्निवीर रोजगार सेल (ARC) स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना, कौशल के अनुसार अवसर दिलाना और स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन देना है।
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुआ पहला बैच 31 दिसंबर 2026 को चार वर्ष की सेवा पूरी कर लौटेगा। इनमें लगभग 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेना में शामिल होंगे, जबकि शेष 75 प्रतिशत युवाओं के लिए नए रोजगार और करियर के अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अग्निवीर रोजगार सेल निभाएगा।
राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने बताया कि पहले बैच की वापसी से पहले ही रोजगार सेल पूरी तरह तैयार कर दिया जाएगा, ताकि सेना से लौटते ही अग्निवीरों का ऑनलाइन पंजीकरण, स्किल मैपिंग और रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सके।
अग्निवीरों को मिलेंगे पांच बड़े करियर विकल्प
1. सरकारी नौकरियों में मिलेगा 10 प्रतिशत आरक्षण
उत्तराखंड सरकार पहले ही राज्य की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय ले चुकी है। इसके अलावा राज्य पुलिस और अन्य सुरक्षा संबंधी विभागों की भर्तियों में भी उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। रोजगार सेल सभी भर्तियों की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा।

2. केंद्रीय सुरक्षा बलों में बढ़ेंगे अवसर
चार वर्षों की सैन्य सेवा के दौरान प्राप्त प्रशिक्षण, अनुशासन, सुरक्षा प्रबंधन और हथियार संचालन का अनुभव केंद्रीय सुरक्षा बलों और रक्षा क्षेत्र की नौकरियों में अग्निवीरों के लिए बड़ा लाभ साबित होगा। रोजगार सेल समय पर भर्ती की जानकारी उपलब्ध कराएगा।

3. निजी कंपनियों में भी मिलेगा रोजगार
राज्य सरकार सुरक्षा सेवाओं, होटल उद्योग, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक इकाइयों और कॉर्पोरेट सेक्टर सहित 50 से अधिक क्षेत्रों की निजी कंपनियों से समन्वय स्थापित करेगी, ताकि प्रशिक्षित अग्निवीरों को बेहतर रोजगार मिल सके।

4. पर्यटन और आपदा प्रबंधन में भी खुलेंगे नए रास्ते
उत्तराखंड में पर्यटन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की लगातार जरूरत रहती है। चारधाम यात्रा, एडवेंचर टूरिज्म, ट्रैकिंग, रेस्क्यू ऑपरेशन और डिजास्टर रिस्पॉन्स जैसे क्षेत्रों में अग्निवीरों की विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।

5. स्वरोजगार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
जो अग्निवीर नौकरी के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षा एजेंसी, फिटनेस सेंटर, एडवेंचर टूरिज्म, ट्रैकिंग सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और अन्य उद्यम शुरू करने के लिए प्रशिक्षण तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

ऐसे करेगा काम अग्निवीर रोजगार सेल
रोजगार सेल को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अग्निवीरों का ऑनलाइन पंजीकरण, स्किल मैपिंग, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी होगी।

डिजिटल स्किल बैंक होगा तैयार
हर अग्निवीर की सैन्य सेवा के दौरान अर्जित तकनीकी कौशल, नेतृत्व क्षमता, सुरक्षा प्रबंधन, आपदा राहत और अन्य प्रशिक्षण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यही रिकॉर्ड आगे ‘स्किल बैंक’ के रूप में काम करेगा, जिससे सरकारी विभागों और निजी कंपनियों को योग्य उम्मीदवारों का चयन करने में आसानी होगी।
स्किल मैपिंग के आधार पर मिलेगा रोजगार
हर अग्निवीर की योग्यता और अनुभव के अनुसार उसकी स्किल मैपिंग की जाएगी। इसी आधार पर तय होगा कि वह किस क्षेत्र की नौकरी के लिए सबसे उपयुक्त है।
जरूरत पड़ने पर मिलेगा अतिरिक्त प्रशिक्षण
यदि किसी नौकरी के लिए अतिरिक्त तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी तो रोजगार सेल 10 से 15 दिन के कैप्सूल कोर्स और स्किल अपग्रेडेशन कार्यक्रम भी संचालित करेगा।

सीएम कार्यालय करेगा निगरानी
पूरी व्यवस्था मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में संचालित होगी। इसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों, स्किल डेवलपमेंट एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। फिलहाल पोर्टल, संचालन व्यवस्था और विभागीय समन्वय का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों के लिए बन सकता है मॉडल
अग्निपथ योजना लागू होने के बाद चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उत्तराखंड सरकार का यह अग्निवीर रोजगार सेल यदि सफल रहता है और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ने में कामयाब होता है, तो यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है। सरकार की कोशिश है कि पहला बैच लौटने से पहले पूरी व्यवस्था लागू कर दी जाए, ताकि किसी भी अग्निवीर को रोजगार के लिए भटकना न पड़े।









