उत्तराखण्डकुमाऊं,

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बिना पंजीकरण संचालित मदरसे ‘मदरसा’ नाम का उपयोग न करें, उल्लंघन पर होगी कार्यवाही

नैनीताल न्यूज– उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिना पंजीकरण अवैध रूप से संचालित मदरसों के मामले में अहम आदेश जारी किए हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मंगलवार को करीब तीन दर्जन से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जिन मदरसों को मदरसा बोर्ड से अनुमति नहीं मिली है, वे अपने संस्थान के नाम के आगे ‘मदरसा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यदि ऐसा पाया जाता है तो जिला प्रशासन को कार्रवाई करने का अधिकार होगा।

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कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मदरसों को प्रशासन ने सील कर दिया है, उनके संचालक एक शपथपत्र देंगे कि संबंधित परिसर में अब कोई भी शिक्षण गतिविधि संचालित नहीं होगी। आगे इन परिसरों में क्या खोला जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार लेगी।

 

 

 

मदरसों का पक्ष

सुनवाई के दौरान मदरसों की ओर से कहा गया कि उन्होंने पंजीकरण के लिए मदरसा बोर्ड में आवेदन किया है, लेकिन अभी तक अनुमति प्रदान नहीं की गई। इसी बीच अप्रैल 2025 में जिला प्रशासन ने प्रदेशभर में करीब 33 मदरसों को सील कर दिया, जबकि उनमें शिक्षण कार्य जारी था।

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सरकार का तर्क

राज्य सरकार की ओर से विरोध दर्ज कराते हुए कहा गया कि वर्तमान में केवल 416 मदरसे ही मदरसा बोर्ड में पंजीकृत हैं और उन्हें ही मान्यता व सरकारी अनुदान प्राप्त है। जो मदरसे सील किए गए, वे बिना अनुमति के चल रहे थे। इनमें धार्मिक अनुष्ठान और नमाज तक हो रहे थे, जो नियमों का उल्लंघन है।

 

 

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कोर्ट का रुख

कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल सील किए गए मदरसों की सील खोली जा सकती है, लेकिन जब तक पंजीकरण और नियमों का पालन नहीं होता, तब तक वहां किसी प्रकार की शिक्षण गतिविधि नहीं चलेगी। यदि संबंधित संस्थान नाम के आगे ‘मदरसा’ लिखते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी नियमों के तहत कार्रवाई करेंगे।

 

 

यह हैं याचिकाएं

याचिका दायर करने वाले मदरसों में मदरसा अब्बू बकर सिद्धीकी, मदरसा जिनन्त उल कुरान, मदरसा दारुल उल इस्लामिया समेत 33से  अधिक मदरसे शामिल हैं।