उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर बड़ा हादसा: लापता 8 लोगों में से 2 के शव मिले, 6 की तलाश जारी; सेना से रेस्क्यू की मांग

भोजखड़क और कच्ची ढांग के पास हिमस्खलन की चपेट में आया था 12 सदस्यीय दल, मृतकों में पश्चिम बंगाल का एक पुरुष और एक महिला शामिल
उत्तरकाशी न्यूज़- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर लापता हुए 8 लोगों में से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं। मृतकों में एक पुरुष और एक महिला शामिल हैं। दोनों पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। वहीं, बाकी 6 लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
बता दें कि 29 अक्टूबर को भोजखड़क और कच्ची ढांग के पास अचानक हुए हिमस्खलन और भारी बर्फबारी की चपेट में आने से 8 लोग लापता हो गए थे। हादसे के बाद से ही SDRF, NDRF, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की टीमें खोज अभियान में जुटी हैं। हालांकि, खराब मौसम और लगातार बर्फबारी के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
27 अक्टूबर को गंगोत्री से ट्रैकिंग पर निकला था दल
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के 7 ट्रैकर, उत्तरकाशी के स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा, एक कुक और तीन पोर्टरों समेत कुल 12 लोगों का दल वन विभाग से अनुमति लेकर 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था।
29 अक्टूबर को वापसी के दौरान भोजखड़क और कच्ची ढांग के पास दल अचानक हिमस्खलन और बर्फबारी की चपेट में आ गया। इस दौरान 8 लोग लापता हो गए, जबकि बाकी चार सदस्य किसी तरह सुरक्षित नीचे पहुंचने में कामयाब रहे।
चार सदस्य सुरक्षित लौटे, तब सामने आया हादसा
30 अक्टूबर को दल के तीन नेपाली पोर्टर और कुक रोहन राणा सुरक्षित गंगोत्री पहुंच गए थे। उन्होंने प्रशासन को आठ लोगों के लापता होने की जानकारी दी। इसके बाद 31 अक्टूबर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
तलाशी अभियान के दौरान घटनास्थल के आसपास कुछ सामान भी बरामद हुआ था। अब दो लोगों के शव मिलने के बाद बाकी छह लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण बचाव दलों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल के पांच दोस्त भी लापता
लापता लोगों में उत्तरकाशी के 25 वर्षीय स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा, उत्तर प्रदेश की 28 वर्षीय वर्तिका वर्मा और एक अन्य ट्रैकर शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच युवक तापस बौरी (30), रतन घोष (23), मनोज खवास (39), रिंटू मंडल (40) और उदय घोष (30) भी इस दल का हिस्सा थे।
बांकुरा के पांचों युवक आपस में दोस्त थे। इनमें मनोज खवास केशरा गांव के रहने वाले थे, जबकि बाकी चार शालबनी के निवासी थे। युवकों के लापता होने के बाद से उनके परिवारों में चिंता और बेचैनी का माहौल है।
पिता से 5 हजार रुपये लेकर ट्रैकिंग पर गया था रतन
लापता रतन घोष के पिता भोलानाथ घोष ने बताया कि उन्होंने बेटे को इस यात्रा पर जाने से मना किया था। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था। पिता के मुताबिक, रतन ने यात्रा पर जाने से रोकने पर रेलवे ट्रैक पर लटककर आत्महत्या करने की धमकी तक दे दी थी। इसके बाद वह पिता से पांच हजार रुपये लेकर ट्रैकिंग पर चला गया।
रतन की बहन लक्ष्मीप्रिया घोष ने बताया कि उसका भाई पिछले तीन साल से इस यात्रा पर जाने की बात कर रहा था। उसने परिवार को बताया था कि वह उत्तराखंड जा रहा है।
वहीं, तापस बौरी के पिता लालमोहन बौरी के अनुसार, ट्रैकिंग पर जाने से पहले बेटे ने फोन कर बताया था कि वह एक सुनसान इलाके में जा रहा है और कुछ दिनों तक फोन पर संपर्क नहीं हो पाएगा। इसके बाद उसका फोन बंद आने लगा।
तापस की बहन कविता बौरी ने बताया कि उन्होंने सोमवार को आखिरी बार भाई से बात की थी। इसके बाद वह ट्रैकिंग के लिए लॉज से निकला था। जब कई दिनों तक संपर्क नहीं हुआ तो परिवार ने लॉज में फोन किया। वहां से पता चला कि पूरा समूह कई दिनों से वापस नहीं लौटा है।
लापता रिंटू मंडल के चाचा कार्तिक मंडल ने बताया कि रिंटू पहले भी तीन से चार बार पहाड़ों पर ट्रैकिंग कर चुका था। इस साल भी लक्ष्मी पूजा के अगले दिन वह यात्रा पर निकला था।
गाइड के पिता ने की सेना और एयरफोर्स को शामिल करने की मांग
इधर, लापता स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा के पिता मोहन राणा और ग्रामीण सोमवार को उत्तरकाशी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्य से मुलाकात कर रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने की मांग की।
मोहन राणा का कहना है कि उनका बेटा और उसके साथी हिमस्खलन की चपेट में आए होंगे। दल के पास दो से तीन दिन तक के खाने-पीने का सामान था। उन्होंने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और खराब मौसम को देखते हुए खोज अभियान में भारतीय सेना और एयरफोर्स के एडवांस्ड हेलिकॉप्टरों को शामिल करने की मांग की है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने भी मांगी रिपोर्ट
इस मामले पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बांकुरा के पांच युवकों के लापता होने पर दुख जताया और उत्तराखंड सरकार व SDRF से उन्हें जल्द तलाशने की अपील की। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है।
फिलहाल खराब मौसम के बावजूद रेस्क्यू टीमें दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। परिजन और स्थानीय ग्रामीण शेष छह लोगों की तलाश के लिए सेना और अतिरिक्त विशेषज्ञ टीमों की मदद लेने की मांग कर रहे हैं।










