उत्तराखण्डकुमाऊं,

पिता का सपना, मां का संघर्ष और बेटी की मेहनत से साकार हुआ डॉक्टर बनने का ख्वाब

मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की बेटी भूमिका ने नीट में हासिल की सफलता, लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय में मिला प्रवेश

लालकुआँ– मेरी बेटी डॉक्टर बनेगी… बेटी के जन्म पर शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी के मुंह से निकले ये शब्द वर्षों बाद सच होने की राह पर हैं। छह साल की बेटी को छोड़कर देश के लिए शहीद हुए पिता का सपना अब बेटी भूमिका अपनी मेहनत से पूरा करने जा रही है। भूमिका ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश पाया है।

 

बिंदुखत्ता के इंद्रानगर प्रथम निवासी मोहन नाथ गोस्वामी वर्ष 2015 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान घायल साथियों को बचाते हुए शहीद हो गए थे। उनकी वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। पिता की शहादत के समय भूमिका महज छह साल की थीं। पति को खोने के बाद मां भावना नाथ ने बेटी की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी अकेले संभाली।

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भावना नाथ बताती हैं कि भूमिका के जन्म के समय ही मोहन नाथ ने कहा था कि उनकी बेटी डॉक्टर बनेगी। यही बात मां और बेटी दोनों के लिए एक संकल्प बन गई। पिता की यादों और उनके सपने को दिल में संजोए भूमिका ने पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया। मां ने भी तमाम कठिनाइयों के बावजूद बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

 

 

नीट की तैयारी के दौरान भूमिका ने लगातार मेहनत की। परीक्षा में सफलता मिलने के बाद लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश मिला तो वर्षों से संजोया सपना जैसे हकीकत के करीब आ गया। बेटी की सफलता पर मां भावना नाथ की आंखों में खुशी के साथ पति की यादें भी ताजा हो गईं।

 

भूमिका की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह उस शहीद पिता के सपने की कहानी है, जिसे मां ने वर्षों तक सींचा और बेटी ने अपनी मेहनत से आगे बढ़ाया। अब भूमिका डॉक्टर बनकर अपने पिता के उस सपने को पूरा करने की राह पर है, जो उन्होंने बेटी के जन्म के समय देखा था।

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पति की शहादत के बाद मां ने बेटी के सपने को बनाया अपना संकल्प

लालकुआं। बेटी के जन्म की खुशी में पिता ने कहा था, “मेरी बेटी डॉक्टर बनेगी।” कुछ साल बाद वही पिता देश के लिए शहीद हो गए। पीछे रह गईं मां भावना नाथ और छह साल की बेटी भूमिका। पति की शहादत के बाद भावना ने बेटी के भविष्य को अपना जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया।

 

वर्ष 2015 में कुपवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी शहीद हो गए थे। भूमिका उस समय महज छह साल की थीं। पिता की कमी को तो कोई पूरा नहीं कर सकता था, लेकिन मां ने बेटी को कभी उनके सपने से दूर नहीं होने दिया। भावना ने बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। भूमिका ने भी मां के संघर्ष को समझा और पूरी मेहनत से पढ़ाई की। नीट में सफलता और दिल्ली के लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद मां-बेटी का वर्षों पुराना सपना नई मंजिल की ओर बढ़ गया है।

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आज बेटी की सफलता में मां को पति के वे शब्द याद आ रहे हैं, जो उन्होंने भूमिका के जन्म के समय कहे थे। पिता का सपना अब बेटी की मेहनत और मां के संघर्ष के सहारे पूरा होने की राह पर है।

 

दूसरा फोटो: मां भावना नाथ के साथ भूमिका गोस्वामी पीछे देहरादून में बनी शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की मूर्ति ।