2027 का चुनाव: लालकुआं में किसके सिर सजेगा जीत का ताज? जनता के मुद्दे और नेताओं की दावेदारी के बीच दिलचस्प हुआ मुकाबला

लालकुआं- उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में संभावित प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। कहीं टिकट को लेकर दावेदार सक्रिय हैं तो कहीं वर्षों से लंबित स्थानीय मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आने लगे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा तीसरी बार भी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी या कांग्रेस इस बार सत्ता परिवर्तन की राह तैयार करेगी?
लालकुआं विधानसभा का चुनाव इस बार केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच चेहरे की लड़ाई नहीं रहने वाला है। यहां बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा, वन भूमि से जुड़े अधिकार, गौला नदी से होने वाला भू-कटाव, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क और पेयजल जैसे मुद्दे चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बिंदुखत्ता का मुद्दा बनेगा सबसे बड़ी चुनावी परीक्षा?
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में बिंदुखत्ता का राजस्व गांव का दर्जा सबसे लंबे समय से उठने वाले मुद्दों में शामिल है। इस मांग को लेकर क्षेत्रवासी लगातार आंदोलन और जनसभाओं के माध्यम से अपनी आवाज उठा रहे हैं। फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में पूर्व में विलोपित घोषणा को दोबारा जीवित करने की मंजूरी दी थी। हालांकि, वन भूमि से जुड़ी औपचारिकताएं और केंद्र सरकार की एनओसी की प्रक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण बनी हुई है।
ऐसे में 2027 के चुनाव में जनता केवल घोषणाओं से संतुष्ट होगी या धरातल पर ठोस प्रगति देखना चाहेगी, यह भाजपा के लिए बड़ी परीक्षा होगी। कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
भाजपा में टिकट को लेकर बढ़ी हलचल, कई चेहरे मैदान में
भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में लालकुआं सीट पर जीत दर्ज की है। वर्तमान में डॉ. मोहन सिंह बिष्ट यहां से विधायक हैं। लेकिन 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के भीतर टिकट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हाल ही में हल्द्वानी स्थित भाजपा कार्यालय में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने संभावित दावेदारों से रायशुमारी की। इसमें पूर्व विधायक नवीन दुम्का, उमेश शर्मा, दीपेंद्र कोश्यारी, देवेंद्र सिंह बिष्ट, मुकेश बेलवाल और कमल मुनि सहित कई नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की। वर्तमान विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और कमलेश चंदोला बैठक में शामिल नहीं हुए।
ऐसे में भाजपा के सामने एक ओर वर्तमान विधायक के कामकाज और जनाधार का सवाल होगा तो दूसरी ओर नए चेहरों और पुराने दावेदारों को लेकर संगठन का निर्णय महत्वपूर्ण रहेगा।
कांग्रेस में भी टिकट के लिए शुरू हुई जोरआजमाइश
दूसरी ओर कांग्रेस भी लालकुआं सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के पुत्र हेमवती नंदन दुर्गापाल, हरेंद्र बोरा, प्रमोद कालौनी, कुंदन मेहता, राजेंद्र खनवाल और हेम दुर्गापाल सहित कई नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा प्रत्याशी चुनने की होगी, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र में संगठन को एकजुट रखने के साथ भाजपा को सीधी चुनौती दे सके।
गौला नदी, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं भी बनेंगी चुनावी मुद्दे
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में गौला नदी से होने वाला भू-कटाव और तटबंध निर्माण की मांग भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई और सड़क जैसी समस्याएं चुनावी बहस का हिस्सा बन सकती हैं।
हल्दूचौड़, मोटाहल्दू, गौलापार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्थिति भी प्रत्याशियों के लिए जनता के बीच जवाबदेही का विषय होगी।
जनता के मन में क्या है सबसे बड़ा सवाल?
2027 के चुनाव में मतदाता प्रत्याशियों से केवल राजनीतिक वादे नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याओं पर ठोस जवाब भी चाहेंगे। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की दिशा में कितनी प्रगति हुई? गौला नदी से प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी सुरक्षा कब मिलेगी? युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कितने बढ़े? स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं में कितना सुधार हुआ?
इन सवालों के जवाब ही चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या भाजपा बचा पाएगी अपना किला या कांग्रेस करेगी वापसी?
लालकुआं की राजनीति में इस बार कई समीकरण एक साथ बनते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के सामने अपनी लगातार दो जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस वापसी के लिए मजबूत प्रत्याशी और स्थानीय मुद्दों के सहारे मैदान में उतरना चाहेगी।
हालांकि अभी चुनाव में समय है और किसी भी दल ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। लेकिन जिस तरह से टिकट को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं और स्थानीय मुद्दे फिर चर्चा में आए हैं, उससे इतना तय है कि 2027 का चुनाव लालकुआं में दिलचस्प होने जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि चुनाव से पहले जनता के बीच कौन सा नेता अपनी पकड़ मजबूत कर पाता है और किस दल को स्थानीय मुद्दों का सबसे अधिक राजनीतिक लाभ मिलता है।










