लालकिला ब्लास्ट के आरोपी से जुड़ा है नाम’… देहरादून में डिजिटल अरेस्ट कर 15 लाख की ठगी

देहरादून न्यूज़- साइबर ठगों ने खुद को नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी (NIA) और एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) का अधिकारी बताकर देहरादून के एक व्यक्ति को देशद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी। ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए पीड़ित को इतना डराया कि उसने अपने बैंक खातों और निवेश से रकम निकालकर करीब 15 लाख रुपये गंवा दिए। पीड़ित की शिकायत पर पटेलनगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
NIA में FIR और लालकिला ब्लास्ट के आरोपी से जोड़कर डराया
पुलिस के अनुसार, पीड़ित के मोबाइल पर 30 जुलाई 2026 को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह त्रिपाठी बताते हुए कहा कि पीड़ित के खिलाफ एफआईआर संख्या 25/2025/NIA/DIL दर्ज है और उसे एनआईए कार्यालय पुणे में पेश होना होगा।
इसके बाद साइबर ठगों ने पीड़ित को बताया कि उसका नाम लालकिला बम ब्लास्ट के आरोपी डॉ. ताहिर से जुड़ा हुआ है। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के बैंक खाते में दो लाख रुपये कमीशन के रूप में आए हैं। इस आरोप से पीड़ित घबरा गया।
फर्जी ATS और DIG अधिकारी से कराई ऑनलाइन बातचीत
ठगों ने इसके बाद पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत कथित ATS अधिकारी संदीप राव और DIG विजय खन्ना से कराई। आरोपियों ने खुद को जांच अधिकारी बताकर पीड़ित को लगातार डराया और कहा कि उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है।
ठगों ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्ती के आदेश भी दिखाए। इसके बाद जांच में सहयोग करने के नाम पर पीड़ित से उसके बैंक खातों और निवेश से संबंधित रकम निकालने के लिए कहा गया।
डाकघर से निकाले 15 लाख, 13 लाख RTGS किए
फर्जी अधिकारियों की धमकियों से डरे पीड़ित ने क्लेमेंटाउन डाकघर से 15 लाख रुपये निकाल लिए। इसके बाद उसने इनमें से 13 लाख रुपये महाराष्ट्र के चांदीवली स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के एसके एंटरप्राइजेज के चालू खाते में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए।
बाद में जब पीड़ित को पूरे मामले में साइबर ठगी होने का एहसास हुआ तो उसने पटेलनगर थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी।
बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच में जुटी पुलिस
शिकायत के आधार पर पटेलनगर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस, NIA, ATS, CBI या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की धमकी देने पर घबराएं नहीं। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर पुलिस या संबंधित थाना पुलिस को सूचना दें।







