उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

अलर्ट! 1 अक्टूबर से बदल जाएंगे जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन के नियम, 2 साल बाद कोर्ट की मंजूरी जरूरी

देहरादून न्यूज़- जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अब समय पर कराना पहले से ज्यादा जरूरी हो जाएगा। देश के साथ उत्तराखंड में भी 1 अक्टूबर 2026 से जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के नियमों में बदलाव लागू होने जा रहा है। नए प्रावधानों के तहत जन्म या मृत्यु की सूचना देने में जितनी अधिक देरी होगी, पंजीकरण के लिए जांच और मंजूरी का स्तर भी उतना ही बढ़ता जाएगा।

 

 

एक साल से ज्यादा और दो साल तक की देरी पर मजिस्ट्रेट की मंजूरी

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से अधिक लेकिन दो साल तक की देरी से कराया जाता है तो इसके लिए जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) या DM की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। संबंधित अधिकारी सूचना और दस्तावेजों की सत्यता की जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में सड़क हादसा: स्कूल जा रही शिक्षिका को डंपर ने रौंदा, इलाज के दौरान मौत

 

 

दो साल बाद JMFC का आदेश जरूरी

वहीं, जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो साल से अधिक समय बाद कराने पर प्रक्रिया और सख्त होगी। ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य होगा। यानी लंबे समय बाद जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड दर्ज कराने वालों को अब केवल पंजीकरण कार्यालय में आवेदन करने से काम नहीं चलेगा।

 

 

1 अक्टूबर से लागू होगा नया कानून

केंद्र सरकार ने रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 के प्रावधानों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करने की तारीख तय की है। संसद के मानसून सत्र में संबंधित संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिली थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह संशोधन कानून बन गया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड- इस जिले में गलत ढंग से राशन लेने वालों पर सख्ती, एक हजार उपभोक्ताओं की यूनिटें राशन कार्ड से निरस्त

 

 

क्यों बदले गए जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम

नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाना है। लंबे समय बाद पंजीकरण कराने वाले मामलों में रिकॉर्ड की सत्यता की जांच जरूरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए देरी की अवधि के आधार पर जांच और मंजूरी का स्तर तय किया गया है।

 

 

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआँ- यहाँ सिंचाई नहर में नवजात शिशु का शव मिलने से मचा हड़कंप

नए नियमों का असर खासतौर पर उन परिवारों पर पड़ेगा, जो बच्चे के जन्म या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु का पंजीकरण लंबे समय तक नहीं कराते हैं। अब देरी बढ़ने के साथ अतिरिक्त मंजूरी की जरूरत होगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे के जन्म का पंजीकरण दो साल से अधिक समय बाद कराया जाता है तो JMFC का आदेश लेना होगा।

 

 

इसलिए परिवारों के लिए जरूरी है कि बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका पंजीकरण निर्धारित समय में ही करा लिया जाए। समय पर पंजीकरण कराने से बाद में होने वाली अतिरिक्त जांच और मंजूरी की प्रक्रिया से बचा जा सकता है।