पिथौरागढ़: हिमालय की ऊंची चोटियों पर मौसम का पहला हिमपात, कैलास मानसरोवर और नारायण आश्रम मार्ग बंद

उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में मौसम ने करवट बदल ली है। जहां एक ओर लगातार हो रही भारी बारिश ने सीमांत क्षेत्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं हिमालय की ऊंची चोटियों पर मौसम का पहला हल्का हिमपात होने की सूचना है। नंदादेवी, नंदाकोट, हरदेवल, त्रिशूली और पंचाचूली समेत कई ऊंची चोटियां बर्फ की हल्की परत से ढक गई हैं। मौसम के पहले हिमपात के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों के तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की जाने लगी है।
जानकारी के अनुसार, मानसून काल में 15 अगस्त के बाद हिमालय की ऊंची चोटियों पर हल्के हिमपात का दौर शुरू हो जाता है। इस दौरान होने वाला हिमपात पाउडर जैसा होता है और धूप निकलने या मौसम साफ होने पर जल्दी पिघल जाता है। पंचाचूली की चोटियों पर भी बहुत हल्का हिमपात होने की जानकारी सामने आई है।
पिथौरागढ़ में लगातार बारिश, काली नदी चेतावनी स्तर से ऊपर
दूसरी ओर, पिथौरागढ़ जिले में लगातार भारी वर्षा का सिलसिला जारी है। शुक्रवार रात मुनस्यारी, तेजम, कनालीछीना और पिथौरागढ़ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हुई, जबकि अन्य इलाकों में मध्यम वर्षा दर्ज की गई। शनिवार को भी दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही और शाम के समय तेज वर्षा के कारण बाजारों और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा।
बारिश के चलते धारचूला में काली नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़कर 889.50 मीटर तक पहुंच गया है, जो 889 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर बताया जा रहा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
छह स्थानों पर बंद हुआ कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी प्रभावित हुआ है। भारी बारिश के बाद मार्ग पर छह अलग-अलग स्थानों पर मलबा और बड़े बोल्डर आने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है।
इसके अलावा जिले की 16 अन्य आंतरिक सड़कें भी मलबा आने के कारण बंद पड़ी हैं। सड़कें बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के साथ ही आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है।
सड़क वाशआउट होने से चौंदास घाटी के 14 गांव अलग-थलग
प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल नारायण आश्रम को जोड़ने वाले कंच्योती-नारायण आश्रम मार्ग पर बलमी काकड़खेत के पास करीब 100 मीटर सड़क पूरी तरह वाशआउट हो गई है। सड़क बह जाने से श्री नारायण आश्रम समेत धारचूला की चौंदास घाटी के 14 गांवों का संपर्क कट गया है।
इन गांवों के लोग बाजार, बैंक और अस्पताल समेत कई आवश्यक सुविधाओं के लिए धारचूला पर निर्भर हैं। ऐसे में सड़क बंद होने से ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धारचूला से चौंदास घाटी की ओर जाने वाले वाहन रास्ता बंद होने के कारण बैरंग लौट रहे हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि तवाघाट-थानीधार-नारायण आश्रम वैकल्पिक मार्ग भी पहले से बंद है। दोनों मार्गों के बंद होने से चौंदास घाटी के ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कों के बंद होने से सीमांत क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए बंद सड़कों को खोलना बड़ी चुनौती बना हुआ है, जबकि काली नदी के बढ़ते जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।








