नेपाल में भूस्खलन से बनी झील ने बढ़ाई चिंता, काली नदी चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे; बनबसा बैराज पर चौथे दिन भी रेड अलर्ट

देहरादून/पिथौरागढ़- नेपाल के दार्चुला जिले के भट्टार क्षेत्र में भूस्खलन के बाद बनी झील ने भारत के सीमावर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। झील का स्थान भारतीय सीमा से हवाई दूरी के हिसाब से करीब 40 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भट्टार क्षेत्र की चमेलिया नदी आगे जाकर महाकाली नदी में मिलती है। महाकाली नदी भारत और नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा का काम करती है। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अनुसार, काली नदी कालापानी से टनकपुर तक भारत-नेपाल सीमा का हिस्सा बनाती है और आगे मैदानी क्षेत्रों की ओर यही नदी शारदा नदी के नाम से बहती है।
काली नदी चेतावनी स्तर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे
धारचूला क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते काली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर निर्धारित है, जबकि शुक्रवार को इसका जलस्तर 888.90 मीटर दर्ज किया गया। यानी काली नदी चेतावनी स्तर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
जलस्तर बढ़ने से धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा और झूलाघाट समेत नदी किनारे बसे क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने की अपील की है।
नेपाल की झील से बड़े जलप्रवाह की स्थिति में बढ़ सकती है मुश्किल
नेपाल में भूस्खलन के बाद बनी झील से अचानक बड़े पैमाने पर पानी निकलने की स्थिति में भारत के सीमावर्ती इलाकों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पिथौरागढ़ से लेकर चंपावत के सीमावर्ती क्षेत्रों और टनकपुर तक कई आबादी वाले इलाके इस नदी तंत्र से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में गेठीगड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव और हल्दू समेत कई क्षेत्रों में लोगों की नजर नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रख रहा है।
बनबसा बैराज पर चौथे दिन भी रेड अलर्ट, चार पहिया वाहनों की आवाजाही बंद
उधर, बनबसा बैराज पर शारदा नदी का जलस्तर भी लगातार ऊंचा बना हुआ है। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,31,334 क्यूसेक दर्ज किया गया।
इससे पहले सुबह छह बजे जलस्तर 1,02,342 क्यूसेक था। सुबह आठ बजे यह बढ़कर 1,14,906 क्यूसेक पहुंच गया, जबकि 10 बजे 1,18,710 क्यूसेक, दोपहर 12 बजे 1,25,446 क्यूसेक और दोपहर एक बजे 1,29,582 क्यूसेक दर्ज किया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर बनबसा बैराज पर लगातार चौथे दिन चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक रही। बैराज प्रशासन के अनुसार, शारदा नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आने के बाद ही चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू किया जाएगा।
क्षेत्र में एक जून से अब तक करीब 1180 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे नदी-नालों और बरसाती जलधाराओं का जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है।
घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड भी बंद, दोनों ओर फंसे वाहन
लगातार बारिश का असर सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार देर शाम बारिश के बाद घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड पर मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी का हिस्सा दरक गया। भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आने से मार्ग बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
दिल्ली से पिथौरागढ़ आने वाली बस भी रास्ते में फंस गई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने के बाद सड़क खोलने के लिए जेसीबी मशीन मौके पर भेजी गई, लेकिन लगातार पहाड़ी दरकने के कारण मलबा हटाने के कार्य में दिक्कतें आईं।
देर रात तक मार्ग पर यातायात सामान्य नहीं हो पाया था। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर के अनुसार, सड़क खोलने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।








