स्वास्थ्य

रामफल कैंसर की कोशिकाओं पर कर सकता है असर? जानिए इस विदेशी फल के फायदे और जोखिम

हेल्थ डेस्क- रामफल जैसा दिखने वाला एक उष्णकटिबंधीय फल ग्रेविओला (Graviola) इन दिनों अपने संभावित औषधीय गुणों को लेकर चर्चा में रहता है। दावा किया जाता है कि इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व कैंसर कोशिकाओं पर असर डाल सकते हैं। लेकिन क्या यह फल वास्तव में कैंसर का इलाज कर सकता है? वैज्ञानिक शोध इस बारे में क्या कहते हैं? आइए जानते हैं।

 

 

क्या है ग्रेविओला और कहां पाया जाता है?

ग्रेविओला का वैज्ञानिक नाम Annona muricata है। इसे अंग्रेजी में सॉरसॉप (Soursop) और कई देशों में गुआनाबाना (Guanabana) के नाम से भी जाना जाता है। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगने वाला फल है, जिसका पौधा दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के कई गर्म इलाकों में पाया जाता है।

 

 

इसका फल हरे रंग का होता है और बाहरी सतह पर छोटे-छोटे कांटेनुमा उभार दिखाई देते हैं। इसके अंदर सफेद, मुलायम और खट्टा-मीठा गूदा होता है। इसका इस्तेमाल जूस, स्मूदी और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है।

 

 

क्या रामफल कैंसर की कोशिकाओं को मार सकता है?

ग्रेविओला को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके संभावित कैंसररोधी गुणों की होती है। कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में पाया गया है कि इस पौधे के अर्क में मौजूद कुछ यौगिक स्तन, लिवर, प्रोस्टेट और अन्य प्रकार के कैंसर की कोशिकाओं पर असर डाल सकते हैं।

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हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि प्रयोगशाला में कैंसर कोशिकाओं पर किसी पदार्थ का असर दिखना और इंसान में कैंसर का सफल इलाज करना दो अलग-अलग बातें हैं।

 

 

कैंसर रिसर्च यूके और एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के अनुसार, अभी तक ऐसे पर्याप्त विश्वसनीय मानव-अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि ग्रेविओला कैंसर का इलाज कर सकता है। इसलिए इसे कैंसर का प्रमाणित उपचार या कीमोथेरेपी का विकल्प नहीं माना जा सकता।

 

 

इंटरनेट पर ग्रेविओला को कीमोथेरेपी से हजारों गुना अधिक प्रभावी बताने वाले दावे भी किए जाते हैं, लेकिन इन दावों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

 

 

ग्रेविओला में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?

ग्रेविओला के गूदे में फाइबर, विटामिन और कई तरह के खनिज पाए जाते हैं। इसमें पौधों से मिलने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिक भी मौजूद होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि हो सकती है।

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संतुलित आहार में विभिन्न प्रकार के फल शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। हालांकि, किसी फल में पोषक तत्व या एंटीऑक्सीडेंट होने का मतलब यह नहीं है कि वह किसी गंभीर बीमारी को ठीक कर सकता है।

 

 

क्या ग्रेविओला के दूसरे स्वास्थ्य लाभ भी हैं?

ग्रेविओला के अर्क पर सूजन, रक्त शर्करा, रक्तचाप और कुछ सूक्ष्मजीवों से संबंधित प्रभावों को लेकर प्रयोगशाला तथा पशु-अध्ययन किए गए हैं। लेकिन इनमें से कई संभावित लाभों की पुष्टि के लिए इंसानों पर और बेहतर शोध की जरूरत है।

 

 

इसलिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह, संक्रमण या अन्य बीमारियों के इलाज के लिए इस फल अथवा इसके पत्तों के अर्क पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

 

 

क्या ग्रेविओला का सेवन पूरी तरह सुरक्षित है?

ग्रेविओला के फल को सामान्य खाद्य पदार्थ के रूप में खाने और इसके पत्तों, जड़ों या अर्क से बने सप्लीमेंट लेने में अंतर है। पत्तों के अर्क, कैप्सूल और अधिक मात्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की सुरक्षा को लेकर अभी कई सवाल मौजूद हैं।

 

 

कुछ अध्ययनों में इस पौधे के विशेष यौगिकों को तंत्रिका तंत्र पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों से जोड़ा गया है। इसके अलावा, ग्रेविओला रक्तचाप और रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ दवाओं के साथ समस्या हो सकती है।

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इसलिए इसके पत्तों का काढ़ा, कैप्सूल या अर्क औषधि के रूप में लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

 

कैंसर के मरीजों के लिए जरूरी सलाह

कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका उपचार उसके प्रकार, अवस्था और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। ग्रेविओला या किसी अन्य प्राकृतिक उत्पाद को कैंसर का प्रमाणित इलाज मानकर कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार को बंद करना नुकसानदायक हो सकता है।

 

 

यदि कोई मरीज ग्रेविओला या कोई हर्बल सप्लीमेंट लेना चाहता है, तो उसे पहले अपने कैंसर विशेषज्ञ से चर्चा करनी चाहिए।

 

 

निष्कर्ष: ग्रेविओला एक पोषक तत्वों वाला उष्णकटिबंधीय फल है और इसके कुछ यौगिकों पर कैंसर संबंधी शुरुआती शोध हुए हैं। लेकिन फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि यह इंसानों में कैंसर को ठीक कर सकता है। इसे लेकर किसी भी बड़े स्वास्थ्य दावे पर भरोसा करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाणों को समझना जरूरी है।