दुखद खबर: मणिपुर आतंकी हमले में शहीद उत्तराखंड के दो वीर सपूतों को अंतिम सलामी, आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर
इम्फाल एयरपोर्ट पर सेना, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, गुरुवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

मणिपुर के उखरुल जिले में 40 असम राइफल्स के काफिले पर हुए घात लगाकर हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के दो वीर जवानों को बुधवार सुबह पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। इम्फाल स्थित बीर टिकेंद्रजीत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने अल्मोड़ा निवासी वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और पौड़ी गढ़वाल निवासी हवलदार चंद्रमोहन सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि समारोह के बाद सेना के विशेष हेलिकॉप्टर से दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर उत्तराखंड के लिए रवाना किए गए। शाम तक उनके दिल्ली पहुंचने और देर शाम उनके पैतृक गांवों में पार्थिव शरीर पहुंचने की संभावना है। गुरुवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दोनों वीर सपूतों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उखरुल में घात लगाकर किया गया था हमला
सोमवार दोपहर मणिपुर के उखरुल जिले के नुंगशांग कोंग क्षेत्र में 40 असम राइफल्स का काफिला नियमित ऑपरेशनल ड्यूटी पूरी कर शांगशाक बटालियन मुख्यालय लौट रहा था। इसी दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने घात लगाकर अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की और आईईडी विस्फोट किए। हमले के बाद सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच करीब ढाई घंटे तक रुक-रुक कर मुठभेड़ चलती रही।
उत्तराखंड ने खो दिए दो वीर सपूत
हमले में अल्मोड़ा निवासी वारंट ऑफिसर (जीडी) बलवंत सिंह और पौड़ी गढ़वाल निवासी हवलदार (जीडी) चंद्रमोहन सिंह देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। इस हमले में कुछ अन्य जवान भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है।
पोस्टमॉर्टम के बाद सेना को सौंपे गए पार्थिव शरीर
मणिपुर पुलिस के अनुसार, देर रात तक पोस्टमॉर्टम और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर सेना को सौंप दिए गए। चूंकि मामला मणिपुर सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से जुड़ा था, इसलिए आवश्यक प्रक्रियाओं में कुछ समय लगा।
पिता के निधन के बाद तीन दिन पहले ही लौटे थे ड्यूटी
शहीद हवलदार चंद्रमोहन सिंह पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा क्षेत्र के डांडातोली गांव के निवासी थे। उनके पिता गोविंद सिंह का 2 मई को निधन हो गया था। पारिवारिक क्रियाकर्म पूरा करने के बाद वह 3 जुलाई को ही ड्यूटी पर लौटे थे और महज तीन दिन बाद देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उनके परिवार में पत्नी मंजू देवी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। इस दुखद समाचार से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

सेना और सरकार ने दी श्रद्धांजलि
असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, भारतीय सेना की पूर्वी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरएनबी कृष्णन सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना ने कहा कि देश अपने वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेगा और शहीद परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है।
वहीं, मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राज्य की शांति भंग करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कांगपोकपी में भी बढ़ा तनाव
उधर, मणिपुर के कांगपोकपी जिले में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। थिंगखोंगजांग कुकी गांव में चर्च में प्रार्थना के दौरान उग्रवादियों ने गोलीबारी और बमबाजी की, जिसमें एक महिला और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए। कई घरों में आगजनी भी की गई, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड के दोनों वीर सपूतों को पूरा प्रदेश नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।








