गुमशुदा बबीता पांडे और ‘परियों के देश’ की कहानी, 38 दिन की तलाश के बाद भी नहीं मिला सुराग”

उत्तरकाशी न्यूज़- नैनीताल की 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे को दयारा बुग्याल से लापता हुए 38 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस, एसडीआरएफ, डॉग स्क्वायड और सेना की संयुक्त टीमों ने ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन छात्रा का पता नहीं चल सका।
बबीता पांडे 29 मई को अपने दो पुरुष साथियों के साथ उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। तीनों ने रेथल गांव से ट्रेकिंग शुरू की और रात में गोई बेस कैंप में ठहरे। बताया जा रहा है कि उसी रात आधी रात के आसपास बबीता रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं। सबसे अधिक चर्चा ‘परियों के देश’ कहे जाने वाले खैंट पर्वत और स्थानीय लोककथाओं की हो रही है। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि बबीता को कथित तौर पर ‘आंछरी’ या वन देवियां अपने साथ ले गईं। हालांकि इन दावों का कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक आधार नहीं है। स्थानीय संस्कृति में आंछरी से जुड़ी मान्यताएं वर्षों से प्रचलित हैं, लेकिन इन्हें प्रमाणित करने वाला कोई साक्ष्य कभी सामने नहीं आया है।
इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। जिला पर्यटन विभाग के अनुसार, बबीता पांडे और उनके साथियों के नाम दयारा बुग्याल ट्रेक के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पर दर्ज ही नहीं थे।
उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने बताया कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से यह दल गया था, उसने नियमों का उल्लंघन करते हुए एक पुराने फिजिकल परमिट पर बबीता और उनके साथियों के नाम चस्पा कर दिए थे। जब चेकपोस्ट पर परमिट का क्यूआर कोड स्कैन किया गया, तो उसमें पुराने ट्रेकर्स का रिकॉर्ड सामने आया। इससे साफ हुआ कि ट्रेकिंग के लिए वैध डिजिटल परमिट जारी ही नहीं कराया गया था।
बताया जा रहा है कि ऐसा सरकार के राजस्व शुल्क और प्रतिदिन निर्धारित 150 ट्रेकर्स की सीमा से बचने के लिए किया गया। इस खुलासे के बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
फिलहाल बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि हर संभावित पहलू की जांच की जा रही है और मामले से जुड़ी किसी भी लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिवार अब भी बबीता की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।








