देशनई दिल्ली

कोर्ट के आदेश पर बनी FD का ब्याज बैंक मनमर्जी से नहीं घटा सकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने 5.89 करोड़ की जमा पर सुनाया बड़ा फैसला

नई दिल्ली- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी FD को अदालत के आदेश पर बनाया गया है, तो बैंक उस पर मिलने वाली ब्याज दर को अपनी मर्जी से कम नहीं कर सकता। ब्याज दर में कटौती के लिए बैंक के पास ठोस और वैध आधार होना जरूरी है।

 

 

मामला करीब 5.89 करोड़ रुपये की FD से जुड़ा है, जिसे हीरो एक्सपोर्ट्स और टिफिन्स बैरीट्स, एस्बेस्टोस एंड पेंट्स लिमिटेड के बीच विवाद के दौरान अदालत के आदेश पर बनाया गया था। इस मामले में नैटवेस्ट मार्केट्स PLC ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने बैंक की अपील खारिज कर दी।

 

 

कोर्ट के आदेश पर बनाई गई थी FD

मामला जुलाई 2008 का है। हीरो एक्सपोर्ट्स और टिफिन्स बैरीट्स के बीच विवाद के चलते हाईकोर्ट ने टिफिन्स बैरीट्स के बैंक खातों में मौजूद करीब 8.5 करोड़ रुपये सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। इसमें से करीब 5.89 करोड़ रुपये उस समय ABN Amro बैंक में जमा थे। बाद में यह बैंक रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड और फिर नैटवेस्ट मार्केट्स PLC के नाम से संचालित हुआ।

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इसके बाद अदालत ने 5.89 करोड़ रुपये को ऐसी FD में रखने का निर्देश दिया, जिस पर उस समय उपलब्ध सबसे अधिक ब्याज दर मिल सके।

 

 

पहले 7.75 और 8.25 फीसदी मिला ब्याज

FD पर शुरुआत में 7.75 फीसदी ब्याज मिला। इसके बाद ब्याज दर बढ़कर 8.25 फीसदी हुई और फिर 7.75 फीसदी पर आ गई। हालांकि, 30 जनवरी 2018 से बैंक ने ब्याज दर घटाकर महज 3.5 फीसदी कर दी।

 

 

हीरो एक्सपोर्ट्स ने ब्याज दर में इस कटौती का विरोध किया और मामला अदालत के सामने पहुंचा।

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सिंगल जज ने भी बैंक के खिलाफ दिया था आदेश

मई 2019 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने बैंक को पूरी रकम हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने का निर्देश दिया। साथ ही कहा गया कि 30 जनवरी 2018 से मिलने वाले ब्याज की गणना पिछले तीन वर्षों में लागू रही औसत ब्याज दर के आधार पर की जाए।

 

 

इसके बाद नैटवेस्ट मार्केट्स PLC ने इस आदेश को हाईकोर्ट की दो जजों वाली बेंच के सामने चुनौती दी।

 

 

बैंक ने RBI के नियमों का दिया हवाला

नैटवेस्ट की ओर से दलील दी गई कि RBI के नियमों के तहत कमर्शियल बैंकों को घरेलू टर्म डिपॉजिट यानी FD की ब्याज दर तय करने की स्वतंत्रता है। बैंक ने यह भी कहा कि FD की अवधि पूरी होने के बाद यदि उसे आगे नहीं बढ़ाया जाता है तो उस रकम पर सेविंग अकाउंट के हिसाब से ब्याज दिया जा सकता है।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने बैंक की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

 

 

हाईकोर्ट ने बैंक की अपील खारिज की

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की बेंच ने कहा कि एकल न्यायाधीश के फैसले में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने नैटवेस्ट की अपील खारिज कर दी।

 

 

कोर्ट के इस फैसले के बाद बैंक को 5.89 करोड़ रुपये की FD पर अधिक ब्याज का भुगतान करना होगा। इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि अदालत के आदेश पर बनाई गई FD की ब्याज दर को बैंक अपनी सुविधा के अनुसार कम नहीं कर सकता।