उत्तराखण्डगढ़वाल,

उत्तराखंड- पर्यटकों के लिए खुली विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी, घांघरिया से भेजा गया यात्रियों का पहला दल

गोपेश्वर न्यूज़-: विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी शनिवार से पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी। सुबह आठ बजे नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी बीपी मार्तोलिया प्रवेश द्वार पर फूलों की घाटी की यात्रा का शुभारंभ किया।

 

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी शनिवार को पर्यटकों के लिए खुल गई है। उप वन संरक्षक बीबी मर्तोलिया ने घांघरिया बेस कैंप से 48 पर्यटकों के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पिछले साल घाटी में 13,161 पर्यटक पहुंचे थे। डीएफओ ने बताया कि सेंचुरी एरिया होने के कारण पर्यटक फूलों की घाटी में रात्रि को नही रूक सकते है।

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पर्यटकों को फूलों की घाटी का ट्रैक करने के बाद उसी दिन बेस कैंप घांघरिया वापस आना अनिवार्य किया गया है। घांघरिया से पर्यटकों को घाटी में सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक भेजा जाता है। शाम पांच बजे तक उन्हें वापस आना होता है। बेस कैंप घांघरिया में पर्यटकों के ठहरने की समुचित व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि वैली ऑफ फ्लावर ट्रैकिंग के लिए भारत के निवासियों के लिए 200 रुपये तथा विदेशी नागरिकों के लिए 800 रुपये ट्रेक शुल्क निर्धारित है।

 

ट्रैक को सुगम और सुविधाजनक बनाया गया है। फूलों की घाटी के लिए बेस कैंप घांघरिया से टूरिस्ट गाइड की सुविधा भी उपलब्ध है। इस साल फूलों की घाटी 31अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी।

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फूलों की घाटी ट्रैक अपने फूलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस घाटी के रोचक बात ये है कि ये घाटी हर 15 दिन में अपना रंग बदल लेती है। फूलों की कुछ प्रजाति ऐसी है जो आपको सिर्फ यही देखने को मिलती है। फूलों की घाटी दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों से समृद्ध है और जैव विविधता का अनुपम खजाना है।

 

प्रकृति प्रेमियों के लिए फूलों की घाटी से टिपरा ग्लेशियर, रताबन चोटी, गौरी और नीलगिरी पर्वत के बिहंगम नजारे भी देखने को मिलते है।

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खिलते हैं 500 से अधिक प्रजाति के रंग-विरंगे फूल

फूलों की घाटी पहुंचने के लिए बेस कैंप घांघरिया से तीन किमी पैदल चलना पड़ता है। घाटी में अलग-अलग मौसम में पांच सौ से अधिक प्रजाति के रंग-विरंगे फूल खिलते हैं। सबसे अधिक फूल जुलाई-अगस्त में खिलते हैं।

 

इस दौरान सर्वाधिक सैलानियों के पहुंचने से घाटी गुलजार हो जाती है। घाटी का दीदार करने के लिए भारतीय पर्यटकों से 200 और विदेशी पर्यटकों से 800 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जाता है।