उत्तराखण्ड

शारदीय नवरात्रि कल से शुरू, मां शैलपुत्री की पूजा के साथ होगी घटस्थापना; जानें शुभ मुहूर्त और उत्तराखंड के 6 प्रसिद्ध देवी मंदिर

उत्तराखंड न्यूज- शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर, रविवार से होने जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस प्रमुख हिंदू पर्व के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घरों और मंदिरों में घटस्थापना की जाएगी। इस बार नवरात्रि का पर्व 10 दिनों तक चलने की बात कही जा रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

 

 

नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों में कलश स्थापना कर व्रत रखते हैं, वहीं कई भक्त मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अगर आप भी नवरात्रि में पूजा करने या उत्तराखंड के किसी प्रसिद्ध देवी मंदिर में दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो घटस्थापना के शुभ मुहूर्त और यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें जानना आपके लिए उपयोगी रहेगा।

 

 

घटस्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान

ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार, कलश स्थापना करते समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का ध्यान रखना चाहिए। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त में पूजा करना धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

 

 

घटस्थापना के दौरान पूजा स्थल की साफ-सफाई, कलश, जौ, मिट्टी, जल, रोली, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था पहले से कर लें। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना करें।

 

 

नोट: घटस्थापना के सटीक शुभ मुहूर्त और समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग के अनुसार जरूर कर लें।

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मां दुर्गा का हाथी पर आगमन, मुर्गे पर विदाई की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और विदाई मुर्गे पर होने की मान्यता बताई जा रही है। परंपरागत मान्यताओं में हाथी पर देवी के आगमन को सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।

 

 

देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यताओं के रूप में देखा जाता है।

 

 

नवरात्रि में उत्तराखंड के इन 6 प्रसिद्ध देवी मंदिरों में कर सकते हैं दर्शन

नवरात्रि के अवसर पर उत्तराखंड के मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। अगर आप भी इस दौरान माता के दर्शन के लिए यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो प्रदेश के इन छह प्रसिद्ध मंदिरों को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं।

 

 

1. नैना देवी मंदिर, नैनीताल

नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील के किनारे स्थित मां नैना देवी मंदिर कुमाऊं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के दर्शन के बाद नैनी झील, मॉल रोड और आसपास के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण किया जा सकता है। हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों से एक दिन की यात्रा की योजना बनाने वालों के लिए यह अच्छा विकल्प है।

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2. हाट कालिका मंदिर, गंगोलीहाट

पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में स्थित हाट कालिका मंदिर मां महाकाली को समर्पित है। यह कुमाऊं के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाने वाला प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी लिया जा सकता है।

3. कसार देवी मंदिर, अल्मोड़ा

अल्मोड़ा के पास स्थित कसार देवी मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर के आसपास से घाटियों और पर्वतीय क्षेत्रों के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। नवरात्रि में यहां मां के दर्शन करने के साथ अल्मोड़ा शहर और आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर भी की जा सकती है।

4. धारी देवी मंदिर, पौड़ी गढ़वाल

अलकनंदा नदी के किनारे स्थित धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। मां धारी देवी को क्षेत्र की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है। श्रीनगर गढ़वाल और आसपास के धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में भी दर्शन कर सकते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां पहुंचने से पहले यात्रा मार्ग और मंदिर की व्यवस्था की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

5. सुरकंडा देवी मंदिर, टिहरी गढ़वाल

टिहरी गढ़वाल में स्थित सुरकंडा देवी मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्रसिद्ध मंदिर है। यहां से आसपास की पहाड़ियों और मौसम साफ होने पर हिमालय के सुंदर नजारे दिखाई देते हैं। मंदिर तक पैदल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां रोपवे सुविधा का उपयोग करने की योजना बना रहे श्रद्धालु यात्रा से पहले उसके संचालन की स्थिति की जानकारी जरूर लें।

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6. मां पूर्णागिरि मंदिर, चंपावत

चंपावत जिले में टनकपुर के पास स्थित मां पूर्णागिरि मंदिर उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को चढ़ाई, मौसम, पानी और जरूरी सामान की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए।

नवरात्रि की यात्रा पर जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

  • घटस्थापना के लिए अपने स्थानीय पंचांग से शुभ मुहूर्त की पुष्टि करें।
  • मंदिरों में भीड़ को देखते हुए यात्रा की योजना पहले से बनाएं।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलें।
  • पैदल चढ़ाई वाले मंदिरों में आरामदायक जूते और पानी साथ रखें।
  • रोपवे या अन्य परिवहन सुविधा का इस्तेमाल करने से पहले उसके संचालन की पुष्टि कर लें।

 

 

शारदीय नवरात्रि आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का पर्व है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में दर्शन की योजना बनाने वाले भक्तों के लिए यह पर्व धार्मिक यात्रा का भी विशेष अवसर है।