हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर हाईकोर्ट में बड़ा अपडेट, 2 FIR दर्ज; सरकार के आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित

नैनीताल/हल्द्वानी- हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में दो FIR दर्ज की गई हैं। इनमें से एक FIR हल्द्वानी में और दूसरी बेंगलुरु में जीरो FIR के तौर पर दर्ज हुई है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बेंगलुरु में दर्ज जीरो FIR अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर दर्ज की गई थी। अब इस FIR को जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाएगा।
CCTV और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएंगे
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की पुलिस जांच की जाएगी। साथ ही घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जांच के दौरान किसी तरह के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।
सरकार के इस आश्वासन के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।
क्या है हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद?
यह मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सामने आया था। आरोप है कि जनसभा के बाद कुछ लोगों ने सभा स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल का छिड़काव कर कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया था।
इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया था। मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से बयान सामने आए और कार्रवाई की मांग की गई।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी जनहित याचिका
देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से इस मामले को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधि से समाज में वैमनस्यता बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कथित ‘शुद्धिकरण’ करने वालों के खिलाफ हल्द्वानी में FIR दर्ज की गई, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई।
साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
जनहित याचिका में घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से सरकार को मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देने की भी मांग की थी।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी जानकारी RTI के माध्यम से भी जुटाई जा रही है। उनका कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दो FIR दर्ज होने, मामले की जांच करने और CCTV समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिए जाने के बाद जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया गया है।







