उत्तराखण्डकुमाऊं,

बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामला: आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, 29 एकड़ जमीन और 50 हजार लोगों का भविष्य दांव पर

  • सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
  • 2007 से चल रहा कानूनी संघर्ष
  • 2024 की हिंसा के बाद मामला और संवेदनशील

हल्द्वानी न्यूज़- बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से पहले प्रशासन ने हल्द्वानी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है। मामला रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है, जहां करीब 5 हजार परिवार और लगभग 50 हजार लोगों का आशियाना बसा हुआ है। ऐसे में कोर्ट का फैसला हजारों लोगों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

 

📌 क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई, जब बनभूलपुरा और गफूरबस्ती क्षेत्र में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने 0.59 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया था।

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वर्ष 2013 में गौला नदी में अवैध खनन और गौला पुल को हुए नुकसान को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान रेलवे भूमि अतिक्रमण का मुद्दा फिर उठ गया।

 

9 नवंबर 2016 को हाईकोर्ट ने रेलवे को 10 सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

 

प्रदेश सरकार और अतिक्रमणकारियों ने इस भूमि को नजूल भूमि बताते हुए शपथ पत्र दाखिल किया, लेकिन 10 जनवरी 2017 को हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

 

पहली बार 2017 में पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों और राज्य सरकार को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत प्रार्थना पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
6 मार्च 2017 को अदालत ने रेलवे को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई करने को कहा, लेकिन जमीन खाली नहीं कराई जा सकी। इसके बाद अवमानना याचिका भी दाखिल की गई।

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📍 2022-23 में मामला फिर गरमाया
21 मार्च 2022 को एक और जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें रेलवे पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया।

 

20 दिसंबर 2022 को हाईकोर्ट ने रेलवे को एक सप्ताह का नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

 

इसके खिलाफ जनवरी 2023 में स्थानीय निवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

 

5 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि
“50 हजार लोगों को रातों-रात बेघर नहीं किया जा सकता।”

 

साथ ही कोर्ट ने रेलवे और राज्य सरकार को पुनर्वास योजना तैयार करने और समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

 

🔥 8 फरवरी 2024 की हिंसा
8 फरवरी 2024 को नगर निगम ने इलाके में एक अवैध मदरसा और नमाज के लिए बनी इमारत को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद क्षेत्र में हिंसा भड़क गई।
भीड़ ने पुलिस और निगम कर्मचारियों पर हमला किया। बनभूलपुरा थाने को घेर लिया गया और जमकर पथराव हुआ।

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इस हिंसा में 6 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 300 पुलिसकर्मी और कर्मचारी घायल हुए। प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा और उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए थे।

 

🚨 आज की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण?
आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में पुनर्वास, जमीन के स्वामित्व और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।
यह मामला केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के आशियाने और भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।