उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

देहरादून- वन भूमि पर बसे लोगों के अधिकारों पर मंथन को विशेष सत्र बुलाए सरकार: यशपाल आर्या

देहरादून न्यूज़– नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर वन भूमि में रहने वाले परिवारों के हितों और अधिकारों पर गंभीर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि वनाधिकार अधिनियम-2006 से मिलने वाले अधिकार, वन भूमियों के पट्टे और पीढ़ियों से वन भूमि पर रह रहे लोगों की मजबूरी जैसे विषयों पर व्यापक और ठोस चर्चा केवल राज्य विधानसभा के मंच पर ही संभव है।

 

यशपाल आर्य ने अपने पत्र में कहा कि ऋषिकेश के पशुलोक का मामला उच्च न्यायालय के निर्देशों से उत्पन्न हुआ है, लेकिन किसी भी न्यायालय में राज्य के निवासियों को वनाधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकारों और उनकी सामाजिक-आर्थिक विवशताओं पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकती। राज्य के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मामले मौजूद हैं, जहां लोग दशकों से वन भूमि पर रह रहे हैं। ऐसे में लोगों को उजड़ने से बचाना सरकार का प्रमुख कर्तव्य है।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून- सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में इस योजना का किया फ्लैग ऑफ, अब “अपणी सरकार” पोर्टल में 575 सेवाएं हुई ऑनलाइन।

 

उन्होंने 22 दिसंबर 2025 को ऋषिकेश के पशुलोक और उससे लगे क्षेत्रों की 2866 एकड़ भूमि को लेकर आए उच्चतम न्यायालय के कठोर निर्देशों का भी उल्लेख किया। आर्य ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव और मुख्य वन संरक्षक को वन भूमि की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह भूमि वर्ष 1952 में वन विभाग द्वारा मीरा बेन को लीज पर दी गई थी, जहां पशुलोक सेवा समिति के माध्यम से पशु संवर्धन का कार्य शुरू किया गया। बाद में इसी भूमि पर एम्स ऋषिकेश, आईडीपीएल और पशुलोक जैसे सरकारी प्रतिष्ठान विकसित हुए, साथ ही बड़ी संख्या में टिहरी विस्थापितों का भी यहां पुनर्वास किया गया।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी- यहाँ पुलिस ने तीन चोर को गिरफ्तार कर किया चोरी का खुलासा, पकड़े गए चोरों से लाखों के आभूषण किये बरामद

 

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश के अन्य क्षेत्रों का हवाला देते हुए कहा कि गौलापार क्षेत्र का बागजाला गांव 100 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा है। हल्द्वानी के दमुवाढुंगा क्षेत्र में हजारों लोग पीढ़ियों से वन भूमि में निवास कर रहे हैं। वहीं नैनीताल जिले के भाबर क्षेत्र का बिंदुखत्ता 200 वर्षों से अधिक समय से वन भूमि पर बसा हुआ है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड- पौड़ी में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी सवारियों से भरी मिनी बस, 06 यात्रियों की मौत, 22 लोग घायल

 

यशपाल आर्य ने कहा कि इन सभी मामलों में लोगों की आजीविका, पुनर्वास और संवैधानिक अधिकारों का सवाल जुड़ा है। इसलिए प्रदेश सरकार को चाहिए कि वन भूमि पर बसे लोगों के हितों, अधिकारों और उनकी समस्याओं पर गंभीर मंथन के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए, ताकि कोई स्थायी और मानवीय समाधान निकाला जा सके।