हल्द्वानी- अब रसूखदारों पर प्रशासन की नजर, किसी का बड़ा गेट तो किसी का आंगन कब्जे की जमीन पर खड़ा, अब चलेगा पिला पंजा

- दो दिन में 31 भवनों को चिन्हित किया, जिसमें एक सरकारी भवन
- हीरानगर में रसूखदारों का अतिक्रमण, कार्रवाई तक पहुंचेगा सिस्टम?
- जिनके निर्माण पर निशान लगे हैं। सभी संपर्क और प्रभाव वाले
हल्द्वानी न्यूज़– शहर में छोटे-मोटे अतिक्रमण और फड़-खोखों पर बुलडोजर बरसाने वाले प्रशासन, नगर निगम और जिला विकास प्राधिकरण की नजर इस बार रसूखदारों के अतिक्रमण पर पड़ चुकी है।
मामला शहर के पाश इलाके हीरानगर से जुड़ा है। जहां सड़क की जमीन पर कब्जा कर किसी ने बड़ा गेट खड़ा कर दिया तो किसी ने आंगन। दो दिन में 31 भवनों को चिन्हित किया गया है। जिसमें एक सरकारी कार्यालय को बाकी घर है। अब देखना ये है कि सिस्टम कार्रवाई तक कब पहुंचेगा? ये सवाल इसलिए क्योंकि जिनके निर्माण पर निशान लगे हैं। सभी संपर्क और प्रभाव वाले हैं।
वन विभाग की सुरक्षा दीवार से जुड़ा बड़ा हिस्सा
हीरानगर का बड़ा हिस्सा वन विभाग की सुरक्षा दीवार से जुड़ा हुआ है। दीवार के उस तरफ चौड़ी सड़क से जुड़े अधिकांश लोग बड़े कारोबारी वर्ग से जुड़े हुए हैं। इसलिए सड़क के रखरखाव से लेकर स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। अब ताजा मामला अतिक्रमण से जुड़ा है।
सरकारी दस्तावेजों में वन विभाग की दीवार के दूसरी तरफ सड़क की चौड़ाई 60 फीट दर्ज है। लेकिन अतिक्रमण ने सड़क के काफी हिस्से को दबा रखा है। प्रशासन, प्राधिकरण और निगम की योजना है कि जमीन से कब्जा छुड़ाने के बाद चौड़ीकरण किया जाए। इसलिए बुधवार से संयुक्त टीम ने यहां नपाई शुरू कर दी।
पहले दिन 15 घरों मे निशान लगाए गए। दूसरे दिन गुरुवार को 15 घर और एक सरकारी भवन पर निशान लगा। अब इन लोगों को नोटिस भेज कब्जा छोडऩे का समय दिया जाएगा। आदेश न मानने पर बुलडोजर कार्रवाई होगी। तहसीलदार सचिन कुमार ने बताया कि फिलहाल 31 भवन चिन्हित कर लिए गए हैं।
उप निबंधक कार्यालय भी जद में आया
नपाई करते-करते संयुक्त टीम कार्यालय उप निबंधक, फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स के परिसर भी पहुंच गई। नपाई के बाद पता चला कि परिसर का कुछ हिस्सा अतिक्रमण कर बनाया गया है। इसे भी तोड़ा जाएगा।
प्रभावशालियों का अतिक्रमण, शुरू होगी दबाव की राजनीति
संयुक्त टीम ने जैसे-तैसे नपाई का काम तो शुरू कर दिया। लेकिन शहर के अन्य हिस्सों की तरह यहां कार्रवाई करना इतना आसान नहीं है। मामला जिन लोगों से जुड़ा है वो कारोबार से लेकर राजनीति तक में प्रभाव रखते हैं। ऐसे में दबाव की राजनीति भी शुरू होगी। यही वजह है कि अधिकारी भी बहुत ज्यादा खोलकर बात नहीं कर रहे।
