उत्तराखण्डकुमाऊं,

किश्तवाड़ ऑपरेशन में शहीद बागेश्वर के हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को आज सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

बागेश्वर/जम्मू-कश्मीर– जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के दौरान शहीद हुए उत्तराखंड के बागेश्वर निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का आज 20 जनवरी को उनके पैतृक गांव ग्राम पंचायत बिथ्थी (पाण्याती) में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 

शहीद जवान का पार्थिव शरीर आज हेलिकॉप्टर से बागेश्वर लाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें गांव ले जाया जाएगा। वहां सेना की टुकड़ी द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किश्तवाड़ जिले के चत्रू क्षेत्र के मंद्रल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान शुरू किया था। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक ग्रेनेड हमला कर दिया, जिसमें कई सैनिक घायल हो गए। इस हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

 

उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 18-19 जनवरी की रात इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

यह भी पढ़ें 👉  नैनीताल हाईकोर्ट ने गृह सचिव, डीजीपी, आईजी समेत पूर्व विधायक चैंपियन को भेजा नोटिस, जानिए पूरा मामला

 

व्हाइट नाइट कोर ने दी श्रद्धांजलि
व्हाइट नाइट कोर ने 19 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर ट्वीट कर शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। ट्वीट में कहा गया कि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, व्हाइट नाइट कोर और सभी रैंकों ने स्पेशल फोर्स के हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। कोर ने उनके साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।

 

ग्रेनेड हमले में 8 सैनिक घायल
सुरक्षा बलों के अधिकारियों के मुताबिक इस ग्रेनेड हमले में 8 सैनिक घायल हुए थे। हमले के बाद अभियान को कुछ समय के लिए रोका गया, लेकिन सोमवार सुबह से घने जंगलों और खड़ी ढलानों वाले इलाके में सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया है।

 

सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से इलाके में तलाशी अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इलाके में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 2 से 3 आतंकियों के फंसे होने की आशंका है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी- गौलापार हत्याकांड: 11 साल के बालक की बेरहमी से हत्या, चार लोग हिरासत में – ग्रामीणों का पुलिस पर गुस्सा फूटा

 

गांव में पसरा मातम
शहीद होने की खबर जैसे ही उत्तराखंड पहुंची, बागेश्वर जिले के गांव बिथ्थी (पाण्याती) में मातम छा गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग शहीद के आवास पर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं। गांव का माहौल गमगीन है और हर आंख नम नजर आ रही है।

 

 

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंदा गढ़िया, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र छोड़ गए हैं। बड़ा पुत्र राहुल गढ़िया जबकि छोटा पुत्र धीरज गढ़िया कक्षा 4 में पढ़ता है।

 

शहीद की पत्नी लीला गढ़िया दोनों बच्चों के साथ हेलिकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचीं, जहां से उन्हें कपकोट लाया गया। परिजनों के अनुसार पत्नी बार-बार बेसुध हो रही हैं और मासूम बच्चे पिता को याद कर फूट-फूट कर रो रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून- अब नंदा गौरा योजना के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को मिलेगी रसीद।

 

छोटे भाई ने बताया—देश सेवा ही था लक्ष्य
शहीद के छोटे भाई किशन सिंह गढ़िया, जो एंजल एकेडमी स्कूल में शिक्षक हैं, ने बताया कि गजेंद्र सिंह शुरू से ही देश सेवा के लिए समर्पित थे। उनका एकमात्र लक्ष्य देश की रक्षा करना था और वे हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते थे।

 

मुख्यमंत्री धामी ने जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने इस वीर सपूत पर गर्व है और सरकार शहीद के परिवार के साथ हर कदम पर खड़ी है।

 

देश ने एक और वीर सपूत खो दिया, लेकिन हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का बलिदान सदैव अमर रहेगा।