हल्दूचौड़ महाविद्यालय में स्पर्श गंगा दिवस पर एनएसएस का एकदिवसीय शिविर, जल संरक्षण का दिया संदेश

हल्दूचौड़ न्यूज़– लाल बहादुर शास्त्री राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्दूचौड़ में स्पर्श गंगा दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में एकदिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सीमा श्रीवास्तव के दिशा-निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवियों ने रैली निकालकर स्पर्श गंगा अभियान के तहत नदी बचाओ, जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
रैली के पश्चात स्वयंसेवियों द्वारा स्थानीय जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई। इसके उपरांत राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत एक बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया।
बौद्धिक सत्र में बी.एड. विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार चतुर्वेदी, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार जोशी तथा अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप मंडल ने बतौर वक्ता अपने विचार रखे। डॉ. अरुण कुमार चतुर्वेदी ने स्पर्श गंगा अभियान के उद्देश्य एवं उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं डॉ. मनोज कुमार जोशी ने स्वयंसेवियों को संबोधित करते हुए माँ गंगा के ज्ञान और सांस्कृतिक महत्व को समझने की आवश्यकता पर बल दिया तथा उत्तराखंड के चारधाम एवं पंच प्रयाग के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप मंडल ने कहा कि नदियां पर्यावरण का अभिन्न अंग हैं और इनके संरक्षण के बिना जल संरक्षण संभव नहीं है। जीवन को सुरक्षित रखने के लिए जल स्रोतों को बचाना अत्यंत आवश्यक है।
बौद्धिक सत्र का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजीत कुमार सैनी एवं डॉ. सरोज पंत द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर राजकुमार सिंह, प्रोफेसर ललित मोहन पाण्डेय, प्रोफेसर बीना मैथेला, डॉ. कल्पना शाह, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. तारा भट्ट, डॉ. हेमलता गोस्वामी, डॉ. पी. सागर, डॉ. नीलम कनवाल, डॉ. भारत सिंह, डॉ. मनोज पंत, डॉ. राजेंद्र कुमार सनवाल, डॉ. मंजू जोशी, डॉ. गीता तिवारी पाण्डेय, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. कमला पांडे, डॉ. जगत बिष्ट, डॉ. वीरेंद्र सिंह दानू, डॉ. सुनीता भंडारी, डॉ. चंद्रकांता सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं एनएसएस स्वयंसेवी उपस्थित रहे।








