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उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाला पर एक साल का बैन! बिक्री ही नहीं, निर्माण और स्टॉक करने पर भी रोक

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला समेत अन्य खाद्य उत्पादों के कारोबार पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

 

 

 

इस फैसले के बाद अब उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला या किसी अन्य नाम से बेचे जाने वाले प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों का कारोबार नहीं किया जा सकेगा। यह प्रतिबंध 13 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी रहेगा। सरकार के इस कदम को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सिर्फ दुकानों पर बिक्री नहीं, पूरे कारोबार पर प्रतिबंध

सरकार के आदेश का दायरा केवल दुकानों पर होने वाली बिक्री तक सीमित नहीं है। प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण करने, उन्हें गोदामों में रखने, सप्लाई करने और वितरित करने पर भी रोक रहेगी। ऐसे उत्पादों का स्टॉक रखने वाले व्यापारियों और आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों को भी आदेश का पालन करना होगा।

 

 

इस व्यवस्था के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला पर नजर रखेगा, ताकि इनकी बिक्री और वितरण पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।

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अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने आदेश की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक, सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेज दी है। विभाग के मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

 

इसके साथ ही प्रतिबंध संबंधी आदेश को राजकीय गजट में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया के लिए भी भेजा गया है। अब प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की होगी।

 

 

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लिया गया फैसला

आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बन्धन) विनियम, 2011 के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार, खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटिन का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। इसके बावजूद गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों में इनका इस्तेमाल किए जाने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

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जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में ऐसे उत्पादों के निर्माण से लेकर बिक्री तक पर एक साल की रोक लगाई गई है। अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस प्रतिबंध को धरातल पर लागू कराने के लिए किस तरह की कार्रवाई करते हैं।