यूसीएफ ध्वस्तीकरण पर उठे बड़े सवाल गड्ढे भरे, सवाल नहीं!ध्वस्तीकरण के बीच गहरी खुदाई और गड्ढों को मलबे से पाटने पर सवाल

• उपखनिज और स्क्रैप निकासी की शिकायतें जांच के घेरे में
• एसडीएम ने तलब किए अभिले
लालकुआं न्यूज़– यूसीएफ के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण को लेकर मामला लगातार गहराता जा रहा है। करीब 75 फीसदी ध्वस्तीकरण कार्य पूरा होने के बीच परिसर में गहरी खुदाई, उपखनिज निकाले जाने की शिकायत, गड्ढों को मलबे से पाटे जाने तथा ध्वस्तीकरण से निकली सामग्री की निकासी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मामला अब प्रशासनिक और विभागीय जांच के दायरे में है।
शिकायत सामने आने के बाद एसडीएम लालकुआं रेखा कोहली ने यूसीएफ परिसर का निरीक्षण कर ध्वस्तीकरण से संबंधित अभिलेख तलब किए थे। इसके बाद यूसीएफ महाप्रबंधक की संस्तुति पर एमडी स्तर से विभागीय जांच की पहल की गई। इसी बीच परिसर में गहरी खुदाई से बने गड्ढों को जेसीबी के माध्यम से ध्वस्तीकरण के मलबे से पाटे जाने की कार्रवाई सामने आई है।
जांच के बीच गड्ढे भरने से उठे सवाल
गहरी खुदाई क्यों की गई और उससे निकली मिट्टी, पत्थर अथवा अन्य सामग्री का क्या हुआ, यह जांच का अहम बिंदु बन गया है। उपखनिज निकाले या बेचे जाने की शिकायत की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन गड्ढे भर दिए जाने से मौके पर हुई खुदाई की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन प्रभावित होने की आशंका है।
मलबे और स्क्रैप की निकासी भी सवालों में
ध्वस्तीकरण से निकल रहे लोहे, ईंट, लकड़ी, मलबे और अन्य सामग्री को परिसर से बाहर ले जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 18 सितंबर को प्रबंधक की ओर से जारी आदेश में सामग्री की निकासी जिम्मेदार अधिकारियों की संस्तुति और अभिलेखों के आधार पर करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सामग्री की आवाजाही को लेकर सवाल उठने से निगरानी और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
जांच में इन बिंदुओं पर जवाब जरूरी
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ध्वस्तीकरण की स्वीकृत सीमा क्या थी, परिसर में कितनी गहराई तक खुदाई की गई, खुदाई से कितनी सामग्री निकली, ध्वस्तीकरण से निकला कितना मलबा और स्क्रैप परिसर से बाहर गया तथा उसकी अनुमति, मात्रा, वाहन और निकासी का रिकॉर्ड कहां है।
यूसीएफ महाप्रबंधक त्रिभुवन रावत का कहना है कि विभागीय जांच चल रही है। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण जल्द पूरा किया जाना है, इसलिए प्रबंधक के आदेश में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
फिलहाल उपखनिज निकाले अथवा बेचे जाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जांच के बीच गड्ढों को पाटे जाने और सामग्री की निकासी को लेकर उठे सवालों ने यूसीएफ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में जरूर ला दिया है।







