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घुसपैठिया बयान के बाद पहली बार उत्तराखंड आएंगे अखिलेश! 2027 में गठबंधन से चुनाव लड़ने की तैयारी, अब तक नहीं खुला सपा का खाता

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी तैयारियों के बीच अब समाजवादी पार्टी (सपा) भी प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इसी महीने या दिसंबर में देहरादून और हरिद्वार का दौरा कर सकते हैं। 23 अक्टूबर को उत्तराखंड के लोगों को लेकर की गई घुसपैठिया टिप्पणी के बाद यह उनका पहला संभावित उत्तराखंड दौरा होगा। ऐसे में उनके आगमन से प्रदेश की राजनीति में नया विवाद और सियासी टकराव देखने को मिल सकता है।

 

 

अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर भाजपा पहले ही सपा और कांग्रेस को घेर रही है। भाजपा लगातार कांग्रेस से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग कर रही है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस गठबंधन के साथी हैं। ऐसे में अखिलेश के बयान ने उत्तराखंड कांग्रेस के सामने भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। अब उनके संभावित दौरे के दौरान कांग्रेस पर अपने सहयोगी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान को लेकर जवाब देने का दबाव रह सकता है।

 

 

 

गठबंधन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी

सपा प्रदेश में गठबंधन के सहारे विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी की रणनीति भाजपा के खिलाफ विपक्षी मतों का बिखराव रोकने और अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रस्तावित दौरा कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और प्रदेश में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

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सपा की कोशिश उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान और संगठनात्मक ताकत का लाभ उत्तराखंड में उठाने की भी है। खासकर मैदानी क्षेत्रों और यूपी से जुड़े मतदाताओं के बीच पार्टी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है।

 

 

अखिलेश के दौरे के पीछे सपा की ये 4 बड़ी रणनीतियां

1. उत्तराखंड में पार्टी की मौजूदगी मजबूत करना: सपा लंबे समय से उत्तराखंड में मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करने में सफल नहीं रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का दौरा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और राष्ट्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं में उत्तराखंड को शामिल दिखाने की कोशिश है।

2. भाजपा के खिलाफ विपक्षी वोटों को एकजुट करना: सपा गठबंधन के जरिए चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी की रणनीति भाजपा के खिलाफ विपक्षी मतों का बंटवारा रोकने और सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनावी मुकाबले को मजबूत करने की हो सकती है।

3. यूपी की राजनीति का उत्तराखंड में विस्तार: अखिलेश यादव की लोकप्रियता और उत्तर प्रदेश में सपा के राजनीतिक प्रभाव को उत्तराखंड में भुनाने की कोशिश होगी। खासकर मैदानी क्षेत्रों में पार्टी अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है।

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4. पुराने राजनीतिक विवादों के बीच छवि सुधारना: उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान मुलायम सिंह यादव की सरकार की भूमिका और रामपुर तिराहा गोलीकांड को लेकर सपा की छवि पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश का दौरा पार्टी को पुराने विवादों के बीच अपनी बात रखने और प्रदेश में स्वीकार्यता बढ़ाने का अवसर दे सकता है।

 

 

प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने बताईं पार्टी की 5 प्राथमिकताएं

1. इसी महीने या दिसंबर में आ सकते हैं अखिलेश यादव: सपा प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तराखंड दौरे को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व से लगातार संपर्क किया जा रहा है। प्रयास है कि इसी महीने या दिसंबर में देहरादून और हरिद्वार का कार्यक्रम तय हो जाए। दोनों जिलों के कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष को उत्तराखंड बुलाना चाहते हैं।

2. गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने के लिए लगाएंगे पूरी ताकत: सिद्दीकी ने कहा कि गठबंधन के तहत जिन सीटों पर सपा या उसके सहयोगी दल चुनाव लड़ेंगे, वहां पार्टी कार्यकर्ता पूरी ताकत से प्रचार करेंगे। सभी प्रत्याशियों को जिताने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य भाजपा को प्रदेश की सत्ता से बाहर करना है।

3. युवाओं, छात्रों और किसानों के मुद्दे उठाएंगे: प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में युवाओं, छात्रों और किसानों से जुड़े मुद्दे पार्टी की प्राथमिकता में रहेंगे। उन्होंने दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की ओर से दिए गए समर्थन का भी जिक्र किया।

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4. गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की पैरवी: सिद्दीकी ने उत्तराखंड गठन के दौरान मुलायम सिंह यादव की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कौशिक समिति और बड़थ्वाल कमेटी का गठन किया गया था। इन समितियों ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों, अर्थव्यवस्था, किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं और पूर्व सैनिकों से जुड़े विषयों पर रिपोर्ट तैयार की थी। इनमें गैरसैंण को राजधानी बनाने का विषय भी शामिल था।

5. पलायन रोकने और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास पर जोर: प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को गति मिल सकती है। इससे पहाड़ों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।

 

 

अखिलेश के दौरे से गरमा सकती है उत्तराखंड की सियासत

कुल मिलाकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा उत्तराखंड में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। अखिलेश यादव का संभावित दौरा जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर सकता है, वहीं घुसपैठिया टिप्पणी और रामपुर तिराहा गोलीकांड जैसे पुराने मुद्दों को लेकर भाजपा के हमले भी तेज हो सकते हैं। ऐसे में यह दौरा केवल संगठनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी इसके दूरगामी मायने निकल सकते हैं।