देहरादून में शिक्षा निदेशालय में बवाल: शिलापट्ट विवाद पर विधायक उमेश काऊ समर्थकों संग पहुंचे, निदेशक के सिर में गंभीर चोट

देहरादून न्यूज़– राजधानी स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ निदेशक अजय कुमार नौडियाल के कार्यालय पहुंचे। शिलापट्ट पर नाम परिवर्तन को लेकर शुरू हुई बातचीत देखते ही देखते तीखी बहस और फिर हिंसा में बदल गई। धक्का-मुक्की के दौरान निदेशक नौडियाल के सिर में गहरी चोट आई। उन्हें तत्काल कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।
क्या है पूरा विवाद?
जानकारी के मुताबिक रायपुर स्थित एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में लगे शिलापट्ट (पट्टिका) पर नाम परिवर्तन को लेकर विवाद चल रहा था। इस मामले में संबंधित परिवार ने विधायक उमेश शर्मा काऊ से संपर्क किया था। विधायक ने इस विषय में विभाग को पत्र भी लिखा था।
निदेशक स्तर से बताया गया था कि मामला शासन स्तर पर भेजा जा चुका है और सचिव स्तर से निर्णय लिया जाएगा। सचिव रविनाथ रमन को भी इसकी जानकारी दी गई थी। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ था।
समर्थकों के साथ पहुंचे विधायक, बहस ने लिया हिंसक रूप
शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे विधायक काऊ दो दर्जन से अधिक समर्थकों के साथ निदेशक के कक्ष में पहुंचे। शिलापट्ट के मुद्दे पर बातचीत शुरू हुई, लेकिन जल्द ही माहौल गरमा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस इतनी बढ़ी कि दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
इसी दौरान भीड़ में से किसी ने निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। आरोप है कि समर्थकों ने कार्यालय में तोड़फोड़ भी की और कुर्सियां जमीन पर पटककर तोड़ दीं। घटना के बाद पूरे निदेशालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कमरे में बंद करने को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
घटना के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। निदेशक नौडियाल का कहना है कि विधायक ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। वहीं विधायक पक्ष का दावा है कि वे बातचीत कर रहे थे, तभी विभागीय कर्मचारियों ने उन पर हमला किया और बाहर से गेट बंद कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कमरे को बंद किए जाने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही और इस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
निदेशक बोले- शासन स्तर पर दी थी जानकारी
निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने कहा कि शिलापट्ट मामले में विभाग की ओर से शासन स्तर पर प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी और मामला लंबित होने की स्थिति स्पष्ट की गई थी। उन्होंने कहा कि घटना अचानक बढ़ी और पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद सामने आएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे पहले विधायक की ओर से उन्हें कभी कोई धमकी नहीं मिली थी।
कर्मचारियों में आक्रोश, हड़ताल की चेतावनी
घटना के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी तो प्रशासनिक या शासन स्तर पर समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन सरकारी कार्यालय में घुसकर हमला करना अस्वीकार्य है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने राजधानी देहरादून में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े हुए इस विवाद और हिंसा के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मची हुई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की तैयारी की जा रही है।








