देहरादून- 45 लाख में MBBS एडमिशन का खेल! फर्जी फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट मामले में दो गिरफ्तार

देहरादून न्यूज़- NEET-UG में फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए MBBS में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए MBBS एडमिशन दिलाने के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 45 लाख रुपये तक की रकम मांगी गई थी। पुलिस के मुताबिक, तीन अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए जा चुके थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपेश पंडित और अरविंद कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में रूपेश पंडित की अहम भूमिका सामने आई है। वह पिछले करीब पांच साल से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। मेरठ में उसकी MECODO पाठशाला नाम से कंपनी बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, कंसल्टेंसी के जरिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी के अलावा विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA, BCom समेत अन्य पाठ्यक्रमों में एडमिशन दिलाने का काम किया जाता था।
3 सितंबर को सामने आया था मामला
फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के प्रमाण पत्रों को लेकर 3 सितंबर को शिकायत सामने आई थी। जांच के दौरान चार छात्राओं के प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली। चारों ने MBBS में एडमिशन के लिए एक ही फ्रीडम फाइटर धर्मवीर वर्मा के नाम से जुड़े दस्तावेज लगाए थे। सरकारी रिकॉर्ड में जांच के दौरान संबंधित फ्रीडम फाइटर का रिकॉर्ड नहीं मिला।
इसके अलावा आवेदनों में दर्ज पते और अन्य दस्तावेजों की जांच में भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद चारों प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए और इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर हुए MBBS एडमिशन भी रद्द कर दिए गए।
13 सितंबर को दर्ज हुई थी FIR
मामले की जांच के बाद 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंट टाउन थाने में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फ्रीडम फाइटर आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और दस्तावेज फर्जी पाए जाने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू की।
SIT ने संबंधित मेडिकल कॉलेजों से अभ्यर्थियों के दस्तावेज कब्जे में लेकर उनका मिलान किया। जांच में कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद इन पतों की पड़ताल कर अभ्यर्थियों के मूल पते और दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई।
धर्मवीर वर्मा के परिवार और पटवारी से पूछताछ
जांच के दौरान SIT ने उस फ्रीडम फाइटर धर्मवीर वर्मा के परिवार से भी पूछताछ की, जिसके नाम का इस्तेमाल प्रमाण पत्रों में किया गया था। उनके बेटे के बयान भी लिए गए। इसके साथ ही संबंधित पटवारी से भी पूछताछ की गई।
पुलिस जांच का अहम बिंदु यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित फ्रीडम फाइटर का रिकॉर्ड नहीं मिला, तो उसके नाम से प्रमाण पत्र तैयार होकर सरकारी सत्यापन की प्रक्रिया तक कैसे पहुंच गया। अब पुलिस आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
बेटी के एडमिशन के लिए संपर्क, फिर दो और अभ्यर्थी जुड़े
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अरविंद कुमार ने अपनी बेटी के MBBS एडमिशन के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। इसके बाद उसने अपने दो परिचितों के बच्चों के एडमिशन की बात भी रूपेश से की।
पुलिस के मुताबिक, रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों को फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के जरिए MBBS में एडमिशन दिलाने की बात कही। इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 45 लाख रुपये मांगे गए। तीनों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। बाकी रकम एडमिशन और कक्षाएं शुरू होने के बाद लेने की बात तय हुई थी।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग कॉलेजों में दाखिला
पुलिस के अनुसार, रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फ्रीडम फाइटर आश्रित प्रमाण पत्र तैयार किए गए और अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला कराया गया।
अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, प्रमाण पत्र तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही और आवेदन से लेकर सरकारी सत्यापन एवं प्रमाण पत्र जारी होने तक किस-किस स्तर पर इन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
CSC सेंटर भी जांच के घेरे में
जांच में कुछ CSC सेंटरों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि इन्हीं माध्यमों से फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कराने में मदद ली गई। अब संबंधित CSC सेंटरों के डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज तैयार होने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला नेटवर्क किन लोगों के संपर्क में था और सरकारी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया में ये दस्तावेज कैसे आगे बढ़े।
दो आरोपी गिरफ्तार, करीब 12 लोग रडार पर
SIT की जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को रायपुर थाने लाकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, करीब 30 वर्षीय रूपेश पंडित मूल रूप से शिवपुरी, थाना केहाट, जिला पूर्णिया, बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में मेरठ की हरिकापुरी कॉलोनी में रह रहा था। दूसरा आरोपी अरविंद कुमार बहादुरपुर खादर, थाना लक्सर, हरिद्वार का निवासी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, अब तक इस नेटवर्क में करीब तीन लोगों की भूमिका सामने आई है, जबकि लगभग 12 लोग पुलिस की रडार पर हैं। फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।









