उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

देहरादून- 2003 से 2025 तक परिवार रजिस्टर की होगी गहन जांच, CM धामी का सख्त ऐक्शन, फर्जी प्रविष्टियों पर कसेगा शिकंजा

देहरादून न्यूज़– उत्तराखंड में परिवार/कुटुंब रजिस्टर में सामने आ रही अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में वर्ष 2003 से दिसंबर 2025 तक परिवार रजिस्टरों की व्यापक और गहन जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन आए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका को दर्शाती है, इसी को देखते हुए प्रक्रिया को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  स्कूल जाते समय स्कूटी से गिरी मासूम को ट्राले ने कुचला...

 

CDO/ADM स्तर पर होगी जांच
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके। इसके साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO और ADM स्तर पर कराई जाएगी। जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा गया है, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान की जा सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी।

 

नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया होगी और पारदर्शी
CM धामी ने कहा कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को अब और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी हिंसा का मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक को उत्तराखंड पुलिस ने दिल्ली से किया गिरफ्तार

परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार ADO पंचायत को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार SDM के पास है। वर्तमान में यह सेवाएं “अपणी सरकार” पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

 

जन-सांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका
मुख्यमंत्री ने यह निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जन-सांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार को नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड- अब इस जिले में 13 और 14 अगस्त को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद, मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

 

प्रदेशभर में समान रूप से होगी जांच
CM धामी ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच कराई जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के तहत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।

 

गौरतलब है कि फर्जी प्रमाण-पत्र सामने आने के बाद पहले ही पिछले पांच वर्षों में बने निवास प्रमाण-पत्रों की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। वहीं, परिवार रजिस्टर की इस व्यापक जांच में 2003 से जारी फर्जी प्रमाण-पत्रों की वास्तविकता भी सामने आने की संभावना है।