उत्तराखण्डकुमाऊं,

DM नैनीताल की बड़ी कार्यवाही, भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन पर कई भूखंड राज्य सरकार में निहित

नैनीताल न्यूज़- भूमि उपयोग एवं भू-सुधार कानूनों के उल्लंघन के मामलों में कलेक्टर न्यायालय नैनीताल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न प्रकरणों में कई भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई कृषि, बागवानी और आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित भूमि के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

 

 

जानकारी के अनुसार, श्री कैंची धाम क्षेत्र के ग्राम छड़ा, पट्टी मझेड़ा निवासी आनंद सिंह एवं राजेंद्र सिंह पुत्रगण पूरन सिंह को कृषि कार्य हेतु पट्टे पर भूमि आवंटित की गई थी। जांच में पाया गया कि उक्त भूमि पर आवासीय मकान और दुकान का निर्माण किया गया है। मामले की सुनवाई के बाद कलेक्टर न्यायालय ने 0.033 हेक्टेयर नॉन-ज़ेडए भूमि का पट्टा निरस्त करते हुए उसे राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए।

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एक अन्य मामले में हल्द्वानी तल्ली निवासी बच्ची राम, मोहन चंद्र, लीला देवी और भगवती देवी द्वारा सामान्य जाति की महिला के पक्ष में 750 वर्ग फीट भूमि का अंतरण किया गया था। कलेक्टर न्यायालय ने संबंधित भूमि को अंतरण की तिथि से ही राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश पारित किया है।

 

 

 

रामनगर क्षेत्र के ढेला बंदोबस्ती निवासी बाग सिंह को श्रेणी-1(ख) के अंतर्गत 0.100 हेक्टेयर भूमि कृषि पट्टे पर आवंटित की गई थी। निरीक्षण के दौरान उक्त भूमि पर रिसॉर्ट संचालित पाया गया। नियमों के उल्लंघन पर पहले रिसॉर्ट को सील किया गया और बाद में कलेक्टर न्यायालय ने संपूर्ण भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए।

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इसी तरह कुमायूं पेपर पैक्स प्राइवेट लिमिटेड, रामनगर तथा उससे संबद्ध रमेश चावला, रचित चावला, मीना चावला और कनिका चावला द्वारा आवासीय प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि पर रिसॉर्ट का संचालन किया जा रहा था। भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर 3572 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश दिया गया है।

 

 

 

वहीं, एक अन्य प्रकरण में श्रीमती भानवी सिंह, निवासी बैंती कोठी, प्रतापगढ़ (कुंडा) द्वारा ग्राम सुल्तान, श्री कैंची धाम में बागवानी प्रयोजन के लिए खरीदी गई भूमि का निरीक्षण किया गया। जांच में भूमि पर 27 नाशपाती के वृक्ष पाए गए। वृक्षों और उनके लिए छह फीट चौड़े पहुंच मार्ग को सुरक्षित रखते हुए 0.0344 हेक्टेयर भूमि उनके पक्ष में बनाए रखने का निर्णय लिया गया, जबकि शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश जारी किए गए।

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कलेक्टर न्यायालय की इन कार्रवाइयों को भूमि उपयोग नियमों के प्रभावी अनुपालन तथा कृषि एवं बागवानी प्रयोजनों के लिए आवंटित भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।