दुनिया के 5 देशों में इमरजेंसी की तैयारी तेज, नागरिकों से जरूरी सामान जुटाने की अपील; जानिए क्या है वजह

दुनिया के कई देशों में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियां तेज हो गई हैं। ब्रिटेन से लेकर जापान, अमेरिका, जर्मनी और नॉर्वे तक सरकारें अपने नागरिकों और संस्थानों को संभावित संकटों के लिए तैयार रहने की सलाह दे रही हैं। लोगों से घरों में भोजन, पानी, दवाइयां, टॉर्च, रेडियो और नकदी जैसी जरूरी चीजें रखने को कहा जा रहा है। इन तैयारियों के पीछे प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों, युद्ध जैसे हालात और जरूरी सेवाओं में संभावित रुकावटों की आशंका बताई जा रही है।
हालांकि, इन पांचों देशों में तैयारियों की वजह एक जैसी नहीं है। जापान का मुख्य जोर भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने पर है, जबकि ब्रिटेन ने मौसम, साइबर हमलों और अन्य सुरक्षा जोखिमों का जिक्र किया है। अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों को बाहरी आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी संचालित रखने की योजना पर काम कर रहा है। वहीं, जर्मनी और नॉर्वे में भी सुरक्षा एवं आपातकालीन तैयारियों से जुड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
जापान: एक सप्ताह तक का जरूरी सामान रखने की सलाह
जापान में भूकंप और अन्य बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है। देश में नानकाई ट्रफ क्षेत्र में संभावित बड़े भूकंप, राजधानी टोक्यो के नीचे आने वाले भूकंप और माउंट फूजी में ज्वालामुखी विस्फोट जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियां की जा रही हैं।
दी गई जानकारी के अनुसार, जापान में 2 नवंबर को नई आपदा प्रबंधन एजेंसी की शुरुआत प्रस्तावित है। आपदा प्रबंधन मंत्री गोशी होसोनो ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे भोजन, पानी, शौचालय से जुड़ी जरूरतों और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त इंतजाम पहले से रखें। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयारी करने पर जोर दिया जा रहा है, जब आपदा के बाद तत्काल बाहरी सहायता उपलब्ध नहीं हो सके।
जापान में लोगों को कम से कम तीन से पांच दिन और संभव हो तो एक सप्ताह तक की जरूरतों के हिसाब से सामान रखने की सलाह दी जा रही है।
ब्रिटेन: ‘बी रेडी’ अभियान के तहत तीन दिन की तैयारी
ब्रिटेन में सरकार का ‘बी रेडी’ अभियान लोगों को आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार रहने का संदेश देता है। इसके तहत परिवारों को कम से कम तीन दिन तक काम आने वाला जरूरी सामान घर में रखने की सलाह दी गई है। इसमें पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, दवाइयां, टॉर्च, रेडियो और कुछ नकदी शामिल हैं।
ब्रिटेन में खराब मौसम, जंगलों में आग, साइबर हमलों, शत्रु देशों से जुड़े जोखिमों और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों को भी संभावित खतरों में गिना गया है। सरकार की तैयारी का उद्देश्य यह है कि यदि बिजली, संचार, परिवहन या दूसरी जरूरी सेवाएं बाधित होती हैं, तो परिवार कुछ समय तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकें।
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जरूरी सेवाओं को बाधित करने वाले हमलों से निपटने की तैयारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका: सैन्य ठिकानों को 90 दिन तक आत्मनिर्भर बनाने की योजना
अमेरिका में रक्षा विभाग का जोर सैन्य ठिकानों को बाहरी आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी संचालित रखने पर है। दी गई जानकारी के अनुसार, पेंटागन की ‘FORTRESS’ नामक योजना के तहत अमेरिकी सैन्य ठिकानों को कम से कम 90 दिनों तक अपनी जरूरी व्यवस्थाओं के सहारे चलाने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
इसमें बिजली, पानी, ईंधन और संचार जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखना शामिल है। किसी बड़े संघर्ष या आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट आने पर सैन्य ठिकानों का संचालन प्रभावित न हो, इसी उद्देश्य से ऐसी तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है।
यह योजना मुख्य रूप से सैन्य प्रतिष्ठानों की तैयारी से जुड़ी है। इसे आम अमेरिकी नागरिकों के लिए 90 दिनों का राशन जमा करने के सरकारी निर्देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जर्मनी: युवाओं को सैन्य सेवा से जुड़ी प्रश्नावली
जर्मनी में सैन्य सेवा और रक्षा तैयारियों को लेकर भी कदम उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 18 वर्ष के युवाओं को सैन्य सेवा से संबंधित प्रश्नावली भेजने की व्यवस्था की जा रही है। इसे देश की रक्षा क्षमता और संभावित संकटों के लिए तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रश्नावली का जवाब नहीं देने पर 250 यूरो तक जुर्माने का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि, इस प्रावधान की वास्तविक स्थिति और जुर्माना किन परिस्थितियों में लागू होता है, इसकी पुष्टि आधिकारिक नियमों के आधार पर की जानी चाहिए।
जर्मनी में इन कदमों को यूरोप की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच सैन्य तैयारी मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
नॉर्वे: संकट और युद्ध के लिए तैयार रहने का संदेश
नॉर्वे में सरकार नागरिकों को संकट और युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत आत्म-तैयारी यानी Self-Preparedness पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का संदेश है कि आपातकालीन स्थिति में बिजली, पानी, संचार या अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में लोगों के पास बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी सामान और वैकल्पिक इंतजाम होने चाहिए।
इस तरह की तैयारियों का मकसद आपदा या संकट के शुरुआती दिनों में नागरिकों को अधिक आत्मनिर्भर बनाना और आपातकालीन सेवाओं पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को कम करना है।
क्या दुनिया में किसी बड़े संकट की आशंका है?
पांच देशों में चल रही इन तैयारियों से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि दुनिया में कोई बड़ा युद्ध या वैश्विक आपातकाल निश्चित रूप से आने वाला है। अलग-अलग देशों की तैयारियां उनकी भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा संबंधी जरूरतों पर आधारित हैं।
इन सभी पहलों में एक बात समान है—सरकारें चाहती हैं कि किसी अप्रत्याशित संकट के दौरान नागरिक शुरुआती कुछ दिनों तक भोजन, पानी, दवाइयों और दूसरी जरूरी चीजों के लिए पूरी तरह बाहरी मदद पर निर्भर न रहें।
आम लोगों के लिए सीख: घर में पीने का पानी, कुछ दिनों का सुरक्षित भोजन, नियमित दवाइयां, टॉर्च, बैटरी, जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां और थोड़ी नकदी रखना समझदारी भरा कदम है। हालांकि, सामान की मात्रा और तैयारी स्थानीय प्रशासन की सलाह तथा अपने परिवार की जरूरतों के अनुसार तय करनी चाहिए।










