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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ा खतरा, खांसी-जुकाम और बुखार है तो बच्चों को स्कूल न भेजें; स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि अगर बच्चे में खांसी, जुकाम या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे स्कूल न भेजें। ऐसे बच्चों को घर पर आराम कराने के साथ चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।

 

 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों को लक्षणों की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-ए में हल्का बुखार, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण वाले मरीजों को घर पर आइसोलेट रहने की सलाह दी गई है।

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वहीं श्रेणी-बी में तेज बुखार और अधिक खांसी होने पर मरीज को घर में आइसोलेशन के साथ चिकित्सक की सलाह लेने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लक्षणों को नजरअंदाज न करने और स्थिति बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की अपील की है।

 

 

श्रेणी-सी के मरीजों में सांस फूलना, बेचैनी और लो ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मरीजों को घर पर रखने के बजाय अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है।

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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में शुक्रवार को स्वाइन फ्लू के आठ नए मामले सामने आए। इसके साथ ही अब तक जिले में स्वाइन फ्लू के कुल मामलों की संख्या 565 पहुंच गई है। इनमें से 485 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 78 सक्रिय मामले हैं।

 

 

इसी दौरान डेंगू के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिले में डेंगू के पांच नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 383 नमूनों की जांच की, जिसके बाद जिले में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 189 हो गई है। इनमें से 166 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

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स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वायरल संक्रमण के लक्षण दिखने पर सावधानी बरतें और विशेष रूप से बच्चों को बीमारी की स्थिति में स्कूल भेजने से बचें। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।