उत्तराखण्डकुमाऊं,

11 दिन से लापता नैनीताल की ट्रेकर बबीता का नहीं मिला सुराग, 150 से ज्यादा जवानों का मेगा सर्च ऑपरेशन जारी

उत्तरकाशी- दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता नैनीताल की 24 वर्षीय ट्रेकर बबीता पांडे का 11 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बबीता की तलाश में मंगलवार को उत्तरकाशी पुलिस ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अभियान में पुलिस, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग, सेना से जुड़े जवानों और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम) की टीमों समेत 150 से अधिक कर्मी जुटे हुए हैं।

 

 

 

सर्च टीमों द्वारा दयारा बुग्याल क्षेत्र के घने जंगलों, गहरी खाइयों, गुफाओं, झीलों और दुर्गम ढलानों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वॉयड की मदद से भी सुराग तलाशे जा रहे हैं।

 

 

कौन हैं बबीता पांडे?

बबीता पांडे नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र के चिल्किया गांव की रहने वाली हैं। वह एमबीए की छात्रा होने के साथ-साथ एक निजी कंपनी के लिए घर से ऑनलाइन कार्य भी करती थीं। परिवार के अनुसार उन्हें ट्रैकिंग और घूमने-फिरने का शौक था।

 

 

25 मई को वह अपने दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी घूमने गई थीं। यात्रा के दौरान उन्होंने हर्षिल, गंगोत्री समेत कई पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इसके बाद तीनों ने दयारा बुग्याल ट्रैक पर जाने का निर्णय लिया। 28 मई को वे रैथल गांव पहुंचे और एक होमस्टे में रुके। अगले दिन 29 मई को उन्होंने ट्रैकिंग शुरू की और रात में गोई बेस कैंप के पास टेंट लगाकर ठहरे।

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बताया गया कि रात के दौरान बबीता टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटीं। सुबह साथियों ने उनकी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चलने पर पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। तभी से लगातार खोज अभियान जारी है।

 

 

रैथल और बारसू गांव तक चल रही तलाश

सर्च ऑपरेशन में स्थानीय ग्रामीण भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रैथल और बारसू गांव के लोगों की मदद से विभिन्न क्षेत्रों में तलाशी ली जा रही है। टीमों को अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित कर अभियान संचालित किया जा रहा है।

 

 

परिवार को अपहरण की आशंका

बबीता के भाई हर्षित पांडे का कहना है कि लगातार कई दिनों की खोजबीन के बावजूद कोई सामान, कपड़ा या अन्य सुराग नहीं मिलने से परिवार को मामले में गड़बड़ी महसूस हो रही है। उनका कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बबीता किसी दुर्घटना का शिकार हुई हैं।

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हालांकि परिवार ने अपहरण की आशंका जताई है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनके पास किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों को उस समय क्षेत्र में मौजूद सभी लोगों से विस्तृत पूछताछ करनी चाहिए।

 

 

साथ गए युवकों से पूछताछ जारी

पुलिस ने बबीता के साथ ट्रैकिंग पर गए दोनों युवकों से कई दौर की पूछताछ की है। परिजनों की शिकायत के आधार पर दोनों के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस उनके मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और गतिविधियों की जांच कर रही है।

 

 

परिवार ने की सीबीआई जांच की मांग

परिवार का कहना है कि वे प्रशासन और पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों से संतुष्ट हैं, लेकिन मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए सीबीआई जांच चाहते हैं। उनका कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 29 मई की रात बबीता कहां गईं और उनके साथ क्या हुआ।

 

 

फर्जी ट्रैकिंग परमिट का भी हुआ खुलासा

जांच के दौरान ट्रैकिंग परमिट में अनियमितताओं का मामला भी सामने आया है। पर्यटन विभाग की जांच में पता चला कि जिस परमिट के आधार पर बबीता और उनके साथी दयारा बुग्याल गए थे, उसमें फर्जीवाड़ा किया गया था। बताया गया कि एक एजेंसी ने पुराने परमिट में नाम बदलकर नया परमिट तैयार किया था।

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क्यूआर कोड की जांच में पुराने ट्रेकर्स के नाम सामने आने के बाद अनियमितता की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित ट्रैकिंग एजेंसी का पंजीकरण अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है और मामले की अलग से जांच की जा रही है।

 

 

घर में बढ़ती बेचैनी, मां की हालत सबसे खराब

बबीता के लापता होने के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं है। बबीता नौकरी कर परिवार की आर्थिक मदद करती थीं। उनके गायब होने के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया है।

 

 

परिजनों का कहना है कि बबीता की मां लगातार रो रही हैं और परिवार का हर सदस्य उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार को अब भी विश्वास है कि किसी दिन कोई सूचना मिलेगी और बबीता सकुशल घर लौट आएंगी।