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PAN Card सिर्फ ITR के लिए नहीं! इन 5 बड़े कामों में अनिवार्य, नहीं तो रुक सकता है काम और लग सकता है ₹10,000 तक जुर्माना

नई दिल्ली- अधिकांश लोग पैन कार्ड (Permanent Account Number) को केवल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का दस्तावेज मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह आपके हर बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए बेहद महत्वपूर्ण पहचान पत्र है। प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर शेयर बाजार में निवेश, महंगी खरीदारी और बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य बिना पैन कार्ड के पूरे नहीं हो सकते।

 

 

अगर आप भविष्य में कोई बड़ा वित्तीय लेन-देन करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में पैन कार्ड अनिवार्य होता है और गलत जानकारी देने पर क्या कार्रवाई हो सकती है।

 

इन 5 कामों में पैन कार्ड है जरूरी

1. प्रॉपर्टी और महंगी गाड़ियों की खरीद यदि आप 20 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति (जमीन, मकान या प्लॉट) खरीदते या बेचते हैं, तो पैन कार्ड देना अनिवार्य है। इसके अलावा 5 लाख रुपये से अधिक कीमत की नई कार या दोपहिया वाहन खरीदने पर भी पैन नंबर देना आवश्यक होता है।

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2. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और डीमैट अकाउंट शेयर बाजार में निवेश करने या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है और डीमैट अकाउंट बिना पैन कार्ड के नहीं खुल सकता। वहीं, गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनी के 1 लाख रुपये से अधिक मूल्य के शेयरों के लेन-देन में भी पैन कार्ड आवश्यक है।

 

 

3. 2 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी यदि किसी एक लेन-देन में आप 2 लाख रुपये से अधिक मूल्य का सामान या कोई सेवा खरीदते हैं, तो पैन कार्ड की जानकारी देना जरूरी हो सकता है। यह नियम बड़े वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

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4. गलत पैन नंबर देने पर जुर्माना किसी भी वित्तीय दस्तावेज या टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड में गलत या फर्जी पैन नंबर दर्ज करने पर आयकर नियमों के तहत 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा आपका TDS क्रेडिट अटक सकता है और मामला आयकर विभाग की जांच के दायरे में भी आ सकता है।

 

 

5. हर बड़े लेन-देन पर रहती है आयकर विभाग की नजर आज के डिजिटल दौर में आपके बड़े वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड आयकर विभाग के Annual Information Statement (AIS) और Statement of Financial Transactions (SFT) में दर्ज होता है। विभाग आधुनिक डेटा एनालिटिक्स के जरिए आपकी घोषित आय और खर्चों का मिलान करता है। यदि आय और खर्च में बड़ा अंतर पाया जाता है तो विभाग स्पष्टीकरण मांगते हुए नोटिस जारी कर सकता है।

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क्या रखें ध्यान?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन के दौरान सही पैन नंबर ही दर्ज करें और अपनी आय के अनुरूप ही खर्च करें। इससे भविष्य में आयकर विभाग की किसी भी अनावश्यक कार्रवाई या नोटिस से बचा जा सकता है।