उत्तराखंड में यूसीसी संशोधन लागू: विवाह और लिव-इन में धोखाधड़ी, दबाव व गैरकानूनी कृत्यों पर सख्त सजा, राज्यपाल ने अध्यादेश को दी मंजूरी

देहरादून न्यूज– उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को और अधिक सख्त व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसके साथ ही प्रदेशभर में नए बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
सरकार द्वारा अगस्त में विधानसभा से पारित संशोधन विधेयक को कुछ तकनीकी त्रुटियों के कारण पहले लौटाया गया था। अब संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश के माध्यम से संशोधन लागू कर दिए गए हैं। आगामी विधानसभा सत्र में सरकार इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में पेश करेगी, जिसे पारित होने के बाद यूसीसी कानून का स्थायी हिस्सा बनाया जाएगा।
🔹 विवाह और लिव-इन संबंधों में सख्ती
नए संशोधनों के तहत विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि विरुद्ध कृत्यों के मामलों में कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी देने को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। वहीं, लिव-इन संबंध समाप्त होने पर रजिस्ट्रार द्वारा समाप्ति प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
🔹 कानूनों में बदलाव
संशोधित यूसीसी में आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023 को लागू किया गया है।
🔹 प्रशासनिक सुधार
यूसीसी की धारा 12 के तहत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।
यदि सब-रजिस्ट्रार निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला स्वतः पंजीयक और पंजीयक जनरल को अग्रेषित किया जाएगा। सब-रजिस्ट्रार पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील का अधिकार दिया गया है।
दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
🔹 अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- अनुसूची-2 में “विधवा” शब्द के स्थान पर “जीवनसाथी” शब्द का प्रयोग किया गया है।
- विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को दी गई है।
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विवाह और पारिवारिक संबंधों में पारदर्शिता बढ़ाना, धोखाधड़ी पर रोक लगाना और कानून को अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन राज्य में पारिवारिक कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।








