उत्तराखंड चुनाव 2027: BJP ने दूसरे राज्यों के अनुभवी विस्तारकों पर लगाया दांव, 60 पार का लक्ष्य हासिल करने की तैयारी

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार दूसरे राज्यों में अपनाई गई चुनावी रणनीतियों और अनुभवी पदाधिकारियों के अनुभव का सहारा लेने की तैयारी में है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत अन्य राज्यों के अनुभवी पदाधिकारियों को उत्तराखंड में विस्तारक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 60 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।
संगठन ने ऐसे पदाधिकारियों को चुना है, जिन्होंने पिछले डेढ़ से दो वर्षों में विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के दौरान संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हैं। भाजपा का जोर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और मतदाताओं तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर रहेगा।
बूथ प्रबंधन से लेकर नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने तक की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, उत्तराखंड में तैनात किए गए विस्तारकों को चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक गतिविधियों का अनुभव है। उनकी जिम्मेदारी केवल चुनावी तैयारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने और संगठन की योजनाओं को जमीन पर उतारने पर भी जोर रहेगा।
काशीपुर में आयोजित सम्मेलन में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने विस्तारकों को चुनावी तैयारियों के लिए मिशन मोड में काम करने का संदेश दिया। पार्टी की रणनीति के तहत लाभार्थियों से संपर्क, बूथ सशक्तीकरण और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
हरियाणा और दिल्ली के चुनावी अनुभव से मिलेगी मदद
भाजपा उत्तराखंड में दूसरे राज्यों के चुनावी अनुभवों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने और दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी के दौरान अपनाई गई संगठनात्मक रणनीतियों से जुड़े अनुभवों को उत्तराखंड में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी का मानना है कि बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और लाभार्थियों तक पहुंच चुनावी तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी उद्देश्य से अनुभवी विस्तारकों को उत्तराखंड में जिम्मेदारी दी गई है, ताकि चुनाव से पहले संगठन की गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
धामी बोले—काशीपुर से जीत की शुरुआत का रहा है इतिहास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन के दौरान काशीपुर को लेकर कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले भी यहां आयोजित कार्यक्रम शुभ संकेत साबित हुए थे। उन्होंने आगामी चुनाव के लिए पार्टी के 60 पार के लक्ष्य का जिक्र करते हुए संगठनात्मक तैयारियों पर जोर दिया।
भाजपा अब इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर प्रदेशभर में संगठन को सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है। विस्तारकों के जरिए स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद, बूथों की स्थिति का आकलन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने की तैयारी है।
दूसरे राज्यों के चुनावी नतीजों से बढ़ा भरोसा
भाजपा की रणनीति के पीछे हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन से मिले अनुभव भी अहम माने जा रहे हैं। फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं, हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती को अपनी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए रखा।
उत्तराखंड में भी भाजपा इसी तरह बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने और मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने पर ध्यान दे रही है। अब देखना होगा कि दूसरे राज्यों के अनुभवी विस्तारकों के साथ बनाई जा रही यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है।










