उत्तराखंड- सरकार आपके द्वार’ शिविर में सियासी संग्राम: मंच पर भिड़े विधायक महेश जीना और जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी

अल्मोड़ा न्यूज़– जिले के सल्ट क्षेत्र में आयोजित ‘सरकार आपके द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर उस समय राजनीतिक अखाड़ा बन गया, जब कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक महेश जीना और जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला न्याय पंचायत मछोड़ स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मछोड़ में आयोजित शिविर का है, जहां जनसमस्याएं उठाने को लेकर विवाद शुरू हुआ और मंच पर ही बहस का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि शिविर के दौरान जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी क्षेत्र की लंबित विकास योजनाओं और स्थानीय जनता की समस्याएं रख रहे थे। इसी बीच विधायक महेश जीना ने उन्हें बीच में टोका, जिसके बाद दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामला केवल टोका-टोकी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ समय तक मंच पर ही गरमागरम बहस चलती रही, जिससे कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
चाय-पानी की व्यवस्था पर भी उठा विवाद
कार्यक्रम में दूर-दराज के गांवों से पहुंचे ग्रामीणों के लिए हंसा नेगी की ओर से चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था की गई थी। आरोप है कि विधायक ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। इसे लेकर समर्थकों में नाराजगी भी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिविर का उद्देश्य जनसमस्याओं का समाधान करना है, ऐसे में एक चुने हुए प्रतिनिधि को मंच पर बोलने से रोकना उचित नहीं है। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
विधायक का पक्ष
सल्ट विधायक महेश जीना ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिविर स्थल के प्रांगण के भीतर भोजन की व्यवस्था की गई थी, जिस पर प्रशासन ने आपत्ति जताई और व्यवस्था को बाहर करने के निर्देश दिए। विधायक का आरोप है कि निर्देश दिए जाने के बाद जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी भड़क गए और अनावश्यक विवाद खड़ा किया। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ और सहानुभूति लेने के उद्देश्य से इस प्रकार की व्यवस्था की जा रही थी।
जिला पंचायत सदस्य का जवाब
वहीं, जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों की सुविधा के लिए चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि शिविर की जानकारी पहले से ही लोगों को दी गई थी और पूरी व्यवस्था जनसहयोग से की गई थी। उनका आरोप है कि जनहित में की गई पहल का अनावश्यक विरोध किया गया।
घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।








