उत्तराखंड- यहाँ ₹25 हजार के अभाव में रुका नवजात का इलाज, DM की सख्ती से मिली जिंदगी — सिस्टम पर उठे सवाल

उत्तराखंड के उत्तरकाशी से इंसानियत और प्रशासनिक तत्परता की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। यहां ₹25 हजार जमा न होने के कारण एक नवजात का इलाज रुक गया था, लेकिन समय रहते दो जिलाधिकारियों के हस्तक्षेप ने बच्चे को नया जीवन दे दिया।
उत्तरकाशी के एक दूरस्थ गांव के निवासी आशीष गढ़वाली अपने नवजात बच्चे के इलाज के लिए दर-दर भटक रहे थे। पहले उन्होंने चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर जिला अस्पताल का रुख किया, लेकिन कहीं भी संतोषजनक उपचार नहीं मिल सका। मजबूरी में उन्हें देहरादून के महंत इंद्रेश अस्पताल जाना पड़ा।
परिवार की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज शुरू करने से पहले ₹25 हजार जमा करने की शर्त रख दी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास इतनी रकम नहीं थी। यहां तक कि आयुष्मान कार्ड दिखाने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं किया गया।
हालात ऐसे बने कि आशीष की बहन प्रिया ने किसी तरह कुछ पैसे जुटाए, जबकि आशीष को अपना सामान गिरवी रखना पड़ा।
DM के दखल से बदली तस्वीर
मामले की जानकारी मिलते ही उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को फटकार लगाई और खुद पूरे मामले की निगरानी शुरू की।
उनके निर्देश पर तत्काल नवजात के जन्म से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और रेफरल प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को देहरादून भेजा गया।
इसी बीच देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने भी अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी हालत में इलाज नहीं रोका जाएगा।
उन्होंने कहा,
“नियम और प्रक्रियाएं जीवन बचाने के लिए होती हैं, न कि जीवन लेने के लिए।”
इलाज शुरू, बच गई नवजात की जान
दोनों जिलाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने बिना देरी किए नवजात का इलाज शुरू कर दिया। समय पर चिकित्सा मिलने से बच्चे की जान बच गई।
सिस्टम पर सवाल, इंसानियत की जीत
यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, जहां आर्थिक अभाव के चलते इलाज रुक जाता है।
हालांकि, प्रशासन की तत्परता ने यह भी साबित कर दिया कि अगर समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो किसी की भी जान बचाई जा सकती है।








