उत्तराखण्डकुमाऊं,

बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, बच्चों ने भी बुलंद की आवाज; 27 सितंबर की रैली की तैयारी तेज

लालकुआं न्यूज़- बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों की संयुक्त पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। वन अधिकार संगठन, पूर्व सैनिक संगठन, राज्य आंदोलनकारी संगठन और गौला संघर्ष समिति समेत कई संगठनों की ओर से 15 अगस्त से शुरू की गई पदयात्रा में बुधवार को ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 

 

सार्वजनिक अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे पदयात्रा में शामिल हुए और बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के समर्थन में जमकर नारे लगाए। इस दौरान ग्रामीणों से आगामी 27 सितंबर को लालकुआं तहसील में प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की गई।

 

 

बुधवार की पदयात्रा संजयनगर-2 स्थित जगदंबा मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। यहां रात में कीर्तन-भजन और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग और वन अधिकार कानून के प्रति जागरूक किया जाएगा। पदयात्रा गुरुवार को रावतनगर की ओर रवाना होगी।

यह भी पढ़ें 👉  रुड़की में दर्दनाक सड़क हादसा: प्राइवेट बस ने बाइक सवार दो युवकों को रौंदा, मौके पर मौत

 

 

वन अधिकार कानून का दिया हवाला

पदयात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से निवास कर रहे समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के निवारण के लिए बनाया गया है। वक्ताओं के मुताबिक, इसके लिए केंद्र सरकार की अलग से अनुमति आवश्यक नहीं है और न ही 75 वर्षों से एक ही स्थान पर निवास करने की शर्त अनिवार्य है।

 

 

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बिंदुखत्ता को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की जा रही है। वक्ताओं ने सरकार से मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की।

 

 

राजनीतिक दलों पर ठोस पहल नहीं करने का आरोप

वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, सांसद अजय भट्ट और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के मुद्दे पर ठोस पहल नहीं करने का आरोप लगाया।

यह भी पढ़ें 👉  (बड़ी उपलब्धि)एलबीएस की बबीता लेंगी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा।

 

 

उमेश भट्ट ने कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेता दावे में कमी होने की बात कह रहे हैं। यदि वास्तव में कोई कमी है तो सरकार और संबंधित नेताओं को उसे लिखित अभिलेखों के साथ सार्वजनिक करना चाहिए और कमियों को दूर करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

 

 

उन्होंने कहा कि सरकार इच्छाशक्ति दिखाए तो रामनगर और हरिद्वार की तर्ज पर बिंदुखत्ता की अधिसूचना भी जल्द जारी हो सकती है।

 

 

विपक्ष से भी सरकार पर दबाव बनाने की मांग

उमेश भट्ट ने कहा कि विधानसभा में बिंदुखत्ता का मुद्दा उठाने के लिए संगठन नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का आभार व्यक्त करता है, लेकिन यह कहना कि राजस्व ग्राम बनाने का अधिकार केवल मुख्यमंत्री के पास है, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भी सरकार पर लगातार दबाव बनाना चाहिए।

यह भी पढ़ें 👉  बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर 12वें दिन भी पदयात्रा जारी, 27 सितंबर की रैली के लिए जनसंपर्क तेज

 

 

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक नवीन दुमका, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी, हरेंद्र बोरा और नंदन दुर्गापाल समेत कई नेता बिंदुखत्ता में नुक्कड़ सभाएं कर चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन राजस्व ग्राम के मुद्दे पर जनता को कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

 

 

उमेश भट्ट ने आरोप लगाया कि राजनीतिक नेता हर बार राजस्व ग्राम बनाने का वादा कर जनता को गुमराह करते रहे हैं, जबकि वन अधिकार कानून के तहत संघर्ष कर रहे संगठन को उनका अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। संगठन ने 27 सितंबर की रैली को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों से बड़ी संख्या में भागीदारी की अपील की है।