उत्तराखण्डकुमाऊं,

राजस्व ग्राम की अधिसूचना पर नहीं बनी बात, अब हल्द्वानी में महारैली कर घेराव करेंगे बिंदुखत्ता के लोग

लालकुआं न्यूज़- बिंदुखत्ता को वन अधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के बाद भी अधिसूचना जारी करने को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलने से आंदोलनकारियों में नाराजगी है। अब आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में महारैली निकालने और जिलाधिकारी का घेराव करने की तैयारी की जा रही है। रविवार को लालकुआं तहसील परिसर में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के सातवें दिन बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों के संयोजक और सहसंयोजक धरने पर बैठे। उत्तराखंड क्रांति दल ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।

 

 

 

15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में जुटेंगे आंदोलनकारी

वन अधिकार संगठन के नेतृत्व में 5 अक्टूबर से लालकुआं तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना जारी है। इससे पहले आंदोलनकारी 15 अगस्त को पदयात्रा और 27 सितंबर को महारैली निकालकर अपनी मांग उठा चुके हैं। रविवार को धरना स्थल पर गीत-संगीत और संबोधनों के माध्यम से राजस्व ग्राम की मांग को बुलंद किया गया।

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धरने में शामिल लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में एक और महारैली आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही जिलाधिकारी का घेराव करने की भी योजना बनाई गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित महारैली को व्यापक रूप देने के लिए बिंदुखत्ता के प्रत्येक घर तक संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा वन भूमि पर बसे अन्य गांवों के लोगों को भी आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वन भूमि पर रह रहे लोगों के अधिकारों की मांग को मजबूती से उठाया जा सके।

 

 

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी क्यों नाराज हैं आंदोलनकारी?

वन अधिकार संगठन के अनुसार, देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट और कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा ने रविवार को धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी।

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संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता को सीधे राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि के अनारक्षण से संबंधित पत्रावली केंद्र सरकार के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट भेजने की बात दोहराई। इस प्रक्रिया को लेकर संगठन ने असंतोष जताया है।

 

 

आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि वन भूमि के अनारक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती है तो इसके बदले आवश्यक दोगुनी भूमि कहां से उपलब्ध कराई जाएगी? उन्होंने यह आशंका भी जताई कि कहीं बिंदुखत्ता का मामला बापू ग्राम की तरह लंबे समय तक लंबित न रह जाए। ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? संगठन का आरोप है कि वन विभाग आज भी बिंदुखत्ता की पुरानी बसासत को अतिक्रमण की सूची में शामिल करता है।

 

 

यूकेडी ने दिया समर्थन, आंदोलन को तेज करने की तैयारी

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को समर्थन देने के लिए उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और जनमैत्री संगठन के बच्ची सिंह बिष्ट धरना स्थल पर पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में यूकेडी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने बिंदुखत्ता के लोगों की मांग का समर्थन करते हुए आंदोलन को मजबूती देने की बात कही।

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धरने में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, नारायण सिंह कोरंगा, सूबेदार खड़क सिंह पपोला और अधिवक्ता बलवंत बिष्ट समेत अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी भागीदारी की।

 

 

अब आंदोलन की अगली रणनीति हल्द्वानी में प्रस्तावित महारैली पर केंद्रित है। आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा और अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर सरकार के सामने अपनी मांग मजबूती से रखी जाएगी।