उत्तराखण्डकुमाऊं,

नैनीताल में निजी स्कूलों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 10 और विद्यालयों को थमाया नोटिस

महंगी किताबें और अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर सख्त हुआ प्रशासन, 15 दिन में जवाब नहीं देने पर मान्यता रद्द करने की चेतावनी

नैनीताल/हल्द्वानी- जनपद नैनीताल में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के मामलों में जिला प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जांच रिपोर्ट और प्राप्त शिकायतों के आधार पर 10 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

 

नोटिस जारी किए गए विद्यालयों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल हिम्मतपुर तल्ला, डी लैंप पब्लिक स्कूल दमुआढूंगा, दर्पण पब्लिक स्कूल हरिपुरनायक कुसुमखेड़ा, इम्युनल पब्लिक स्कूल मुखानी, हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल कलावती कॉलोनी, ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल बरेली रोड, टेंडर फीट पब्लिक स्कूल दमुआढूंगा, एल्केमे स्कूल कुसुमखेड़ा, जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल दमुआढूंगा बंदोबस्ती और न्यू फेगलैंड पब्लिक स्कूल हल्द्वानी शामिल हैं। प्रशासन द्वारा इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 28 विद्यालयों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड- यहाँ भारत-नेपाल सीमा पर सरयू नदी में नहाते वक्त युवक की डूबने से हुई मौत, SSB के जवानों ने निकाला शव।

 

जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
जांच के दौरान पाया गया कि कई निजी विद्यालयों ने एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर रखी हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही पुस्तकें और शिक्षण सामग्री खरीदने का दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी- यहाँ पड़ोसी की अत्येष्टि करने घाट आया युवक, गौला नदी में नहाते हुए बहा, पांच किमी दूर मिली लाश

 

इतना ही नहीं, कई विद्यालयों ने अपनी वेबसाइट पर फीस संरचना और पुस्तक सूची जैसी अनिवार्य जानकारियां भी सार्वजनिक नहीं की हैं।

 

15 दिन में करना होगा पालन
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी कर एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही किसी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने की बाध्यता तत्काल समाप्त करने को कहा गया है।

 

विद्यालयों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे अपनी वेबसाइट पर फीस और पुस्तक सूची का पूरा विवरण सार्वजनिक करें। अभिभावकों द्वारा पहले खरीदी गई अनावश्यक पुस्तकों के धनवापसी या समायोजन की व्यवस्था करने तथा अतिरिक्त वसूले गए शुल्कों को आगामी फीस में समायोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  अवैध खनन पर लगातार दूसरे दिन कार्रवाई, 9 प्लांट सीज, कार्रवाई का वीडियो जारी

 

नहीं माने तो होगी बड़ी कार्रवाई
जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगी।

 

प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में आदेशों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण समेत कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।