उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: देहरादून और हरिद्वार के SSP बदले,

देहरादून/हरिद्वार– उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को 20 अधिकारियों के तबादले करते हुए पुलिस महकमे में अहम बदलाव किए हैं। आदेश के तहत देहरादून और हरिद्वार जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को बदल दिया गया है, जिससे दोनों संवेदनशील जिलों में कानून व्यवस्था की रणनीति नए सिरे से तय होने की संभावना है। शासन ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।
देहरादून में नेतृत्व परिवर्तन
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह को स्थानांतरित कर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ नियुक्त किया गया है। उनकी जगह हरिद्वार में तैनात प्रमेन्द्र डोभाल अब राजधानी जिले की कमान संभालेंगे।

राजधानी देहरादून में तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार, यातायात दबाव, संगठित अपराध और साइबर अपराध पर नियंत्रण नई प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है। नए एसएसपी के सामने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पुलिसिंग में तकनीकी सुदृढ़ीकरण की भी चुनौती रहेगी।
हरिद्वार की कमान नवनीत सिंह को
एसटीएफ में तैनात नवनीत सिंह को हरिद्वार का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। धार्मिक नगरी हरिद्वार में सालभर धार्मिक आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही और संवेदनशील पर्व-त्योहारों के कारण कानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
भीड़ प्रबंधन, खुफिया निगरानी और ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करना नए एसएसपी की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
हरिद्वार में अन्य अधिकारियों के भी तबादले
हरिद्वार में पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं।
जितेंद्र चौधरी को हरिद्वार से हटाकर पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात, उधमसिंह नगर भेजा गया है।
सुश्री निशा यादव को हरिद्वार में ही पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन बदलावों से जिले में अपराध नियंत्रण और ट्रैफिक प्रबंधन की रणनीति में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
नई कार्ययोजना की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दोनों जिलों में अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था की मजबूती और आगामी आयोजनों को ध्यान में रखते हुए नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी। शासन स्तर पर यह बदलाव पुलिसिंग को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
प्रदेश में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था किस तरह से और अधिक सुदृढ़ होती है।








