उत्तराखंड में BJP का ‘ग्राउंड रियलिटी चेक’, विधायकों की बढ़ीं धड़कनें; चुनाव से पहले संगठन जुटा फीडबैक में

देहरादून न्यूज़- आगामी विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही भारतीय जनता पार्टी अब केवल विपक्ष के खिलाफ रणनीति बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने संगठन और विधायकों की जमीनी स्थिति का भी गंभीर आकलन कर रही है। पार्टी ने इसके लिए चुनावी प्रशिक्षण वर्गों को अहम माध्यम बनाया है, जहां चुनावी रणनीति के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के कामकाज का फीडबैक भी जुटाया जा रहा है।
भाजपा के मंडल स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग पूरे हो चुके हैं, जबकि अब जनपदीय प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जा रहे हैं। इन वर्गों में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से विधायकों की सक्रियता, जनता से संवाद, क्षेत्र में मौजूदगी और संगठन के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर राय ली जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों के कामकाज को आधार बनाकर विस्तृत फीडबैक रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
20 मई के बाद पेश होगी रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट 20 मई के बाद आयोजित होने वाले प्रादेशिक प्रशिक्षण वर्ग में प्रस्तुत की जाएगी। भाजपा के भीतर इसे विधायकों का “ग्राउंड रियलिटी चेक” माना जा रहा है। यही वजह है कि कई विधायकों की चिंता भी बढ़ गई है। हालांकि पार्टी इसे संगठनात्मक सुधार और आत्ममंथन की सामान्य प्रक्रिया बता रही है।
भाजपा का मानना है कि लगातार जनादेश बनाए रखने के लिए समय-समय पर जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन की समीक्षा आवश्यक है, ताकि कमजोरियों को समय रहते दूर किया जा सके।
संघ भी जुटा रहा अलग फीडबैक
भाजपा के समानांतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी अपने स्तर पर जनप्रतिनिधियों के कामकाज को लेकर अलग से फीडबैक एकत्र कर रहा है। संघ से जुड़े विभिन्न संगठनों और स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से विधायकों की क्षेत्रीय सक्रियता, सामाजिक स्वीकार्यता और संघ के साथ समन्वय का आकलन किया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की चुनावी रणनीति तय करने में संघ का फीडबैक हमेशा अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस बार भी पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच विधायकों की छवि को गंभीरता से परखा जा रहा है।
कम अंतर से जीती सीटों पर विशेष नजर
भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस उन विधानसभा सीटों पर है, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी को बेहद कम अंतर से जीत मिली थी। पार्टी इन सीटों को आगामी चुनाव के लिहाज से संवेदनशील मान रही है और इन्हें “अलर्ट श्रेणी” में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशिक्षण वर्गों में इन सीटों से जुड़े फीडबैक को विशेष महत्व दिया जाएगा। भाजपा की रणनीति है कि पिछली बार मुश्किल से जीती गई सीटों को इस बार संगठनात्मक मजबूती और बेहतर समन्वय के जरिए सुरक्षित किया जाए।








