अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान: कितने दिन तक टिक पाएगा तेहरान? मिसाइल भंडार, ताज़ा हमले और विशेषज्ञों की राय से पूरी तस्वीर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान कितने दिन तक सैन्य मुकाबला जारी रख सकता है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों की तेज रफ्तार के बीच अब यह जंग केवल सैन्य ताकत की नहीं, बल्कि संसाधनों और रणनीति की भी परीक्षा बन चुकी है।
मिसाइल भंडार पर अलग-अलग दावे
साल 2022 में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अनुमान लगाया था कि ईरान के पास करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। वहीं, जून 2025 में 12 दिन चले इजराइल-ईरान संघर्ष के बाद इजराइल ने दावा किया था कि उसने ईरान की लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल क्षमता को तबाह कर दिया।
हालांकि वॉशिंगटन स्थित थिंकटैंक ज्यूइश इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी के मुताबिक, उस संघर्ष के दौरान ईरान ने इजराइल पर 574 मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद भी रिपोर्ट्स में कहा गया कि ईरान ने हथियार निर्माण की रफ्तार तेज कर दी थी।
तुर्किये के सेंटर फॉर ईरानी स्टडीज (IRAM) के रिसर्चर ओरल टोगा का अनुमान है कि जंग शुरू होने से पहले ईरान के पास करीब 2,000 मिसाइलें मौजूद थीं।
ताज़ा हमलों में कितनी ताकत दिखाई?
28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के साझा हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इजराइल के मुताबिक, दोपहर तक उस पर 35 मिसाइलें दागी गईं।
UAE के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान ने उन पर 164 बैलिस्टिक मिसाइलें, 2 क्रूज मिसाइलें और 542 ड्रोन से हमला किया।
कुवैत ने लगभग 100 मिसाइलें और 283 ड्रोन इंटरसेप्ट करने का दावा किया।
बहरीन ने 45 और कतर ने 44 मिसाइलों को नाकाम करने की बात कही।
इन आंकड़ों से साफ है कि ईरान अभी भी बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम है।
क्या ईरान के हथियार खत्म होने की कगार पर हैं?
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है।
IRAM के ओरल टोगा का कहना है कि ईरान के हथियारों का स्टॉक कम जरूर हो रहा है, लेकिन वह अभी खत्म होने से दूर है और आने वाले कुछ दिनों तक हमले जारी रख सकता है।
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्ट स्टडीज के प्रोफेसर अमीन सैकल के मुताबिक, “ईरान कुछ दिनों में हार नहीं मानेगा, क्योंकि अब यह लड़ाई सत्ता में बने रहने की है। उन्होंने खुद को लंबी लड़ाई के लिए तैयार किया है। उनके पास शॉर्ट और लॉन्ग रेंज की मिसाइलें और हजारों ड्रोन हैं।”
हालांकि कुछ अन्य रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इसी रफ्तार से हमले जारी रखता है, तो उसके हथियार भंडार पर तेजी से दबाव पड़ेगा और कुछ ही दिनों में कमी स्पष्ट दिखने लगेगी। लंबे युद्ध के लिए उसे हमलों की गति नियंत्रित करनी होगी।
आगे क्या?
ईरान के पास अभी भी मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, लेकिन लगातार हमलों की स्थिति में उसकी सैन्य रणनीति निर्णायक साबित होगी। सवाल केवल यह नहीं है कि उसके पास कितने हथियार बचे हैं, बल्कि यह भी है कि वह उन्हें कितनी रणनीतिक तरीके से इस्तेमाल करता है।
फिलहाल संकेत यही हैं कि टकराव कुछ और दिनों तक जारी रह सकता है। लेकिन लंबी लड़ाई में संसाधन, उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय दबाव — तीनों ही अहम भूमिका निभाएंगे।









