उत्तराखण्डकुमाऊं,

छत्तीसगढ़ मुठभेड़ में उत्तराखंड का लाल शहीद, बागेश्वर के कमांडो गजेंद्र सिंह गढ़िया ने देश के लिए दी शहादत

बागेश्वर/देहरादून– छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ हुई मुठभेड़ के दौरान उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के ग्राम पंचायत बिथ्थी (पाण्याती) निवासी कमांडो गजेंद्र सिंह गढ़िया देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। वे 2 पैरा कमांडो फोर्स में सीएसएफ (कमांडो) के पद पर तैनात थे। शहादत की खबर मिलते ही उनके गांव समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर जवान के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “उत्तराखंड के इस वीर सपूत ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।” मुख्यमंत्री ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

 

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गांव में पसरा मातम, हर आंख नम
शहीद होने की सूचना मिलते ही ग्राम बिथ्थी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचने लगे। शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाते हुए ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने वीर सपूत को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया और हर ओर सन्नाटा पसरा रहा।

 

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया के परिवार में उनके पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंदा गढ़िया, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र हैं। बड़ा पुत्र राहुल गढ़िया, जबकि छोटा पुत्र धीरज गढ़िया कक्षा 4 में पढ़ता है और अपनी मां के साथ देहरादून में रहता है। शहादत की खबर से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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देहरादून से कपकोट पहुंचा परिवार, पत्नी बेसुध
शहीद की पत्नी लीला गढ़िया दोनों बच्चों के साथ हेलीकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचीं, जहां से टैक्सी द्वारा उन्हें कपकोट लाया गया। स्वजनों के अनुसार पत्नी बार-बार बेसुध हो रही हैं, जबकि मासूम बच्चे अपने पिता को याद कर उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। इस दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

 

छोटे भाई बोले— देश सेवा ही था जीवन का लक्ष्य
शहीद के छोटे भाई किशन सिंह गढ़िया, जो एंजल एकेडमी स्कूल में शिक्षक हैं, ने बताया कि गजेंद्र सिंह गढ़िया शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे। उनका सपना था कि वे सेना में रहकर देश की रक्षा करें और अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी शहीद की वीरता और बलिदान को नमन किया।

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20 जनवरी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए वीर सपूत गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर 20 जनवरी को हेलीकॉप्टर से बागेश्वर लाया जाएगा। इसके बाद कौसानी सिग्नल के जवानों द्वारा पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

 

 

उत्तराखंड के इस वीर लाल की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देवभूमि का हर सपूत देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने को सदैव तत्पर रहता है।

शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया अमर रहें।