उत्तराखंड में सरकारी विभागों की गाड़ियों में नियमों की अनदेखी, पीली नंबर प्लेट को सफेद कर दौड़ रहीं टैक्सी गाड़ियां, परिवहन विभाग ने शुरू की कार्रवाई

हल्द्वानी न्यूज़- उत्तराखंड में मोटर वाहन अधिनियम 1988 के नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। कई सरकारी विभागों और अधिकारियों द्वारा अनुबंधित व्यावसायिक वाहनों की पीली नंबर प्लेट को सफेद रंग में बदलकर सड़कों पर चलाया जा रहा है। इस मामले के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद परिवहन विभाग हरकत में आया है और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) अरविंद पांडे ने बताया कि सरकारी विभागों में अधिकृत टैक्सी वाहनों की पीली नंबर प्लेट को सफेद कर चलाया जा रहा है, जो कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि विभागीय प्रवर्तन टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह के वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले के संज्ञान में आने के बाद कुछ वाहन स्वामियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं और उनसे 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
आरटीओ (एनफोर्समेंट) अरविंद पांडे ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक पंजीकरण वाहनों की नंबर प्लेट में परिवर्तन करना मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे वाहन यदि सड़कों पर चलते हुए पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ परिवहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
रुतबा दिखाने के लिए नियमों का उल्लंघन
गौरतलब है कि उत्तराखंड के कई सरकारी विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार टैक्सी वाहनों को अनुबंध पर लेते हैं, जिनके लिए टैक्सी नंबर (टीए) जारी किया जाता है और पीली नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन कई अधिकारी अपने रुतबे को दिखाने के लिए नियमों का उल्लंघन करते हुए टैक्सी वाहनों की पीली नंबर प्लेट को सफेद करवा रहे हैं।
इतना ही नहीं, परिवहन नियमों के अनुसार व्यावसायिक पंजीकरण वाहनों पर “उत्तराखंड सरकार” या “भारत सरकार” लिखना, तथा लाल और नीली बत्ती लगाना भी कानूनन अपराध है। बावजूद इसके, राज्य और केंद्र सरकार के कई अधिकारी अनुबंधित टैक्सी वाहनों पर सरकारी चिन्ह और सायरन लाइट लगाकर उनका उपयोग कर रहे हैं, जबकि परिवहन विभाग की ओर से अब तक इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई है।
पहचान छुपाने से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि सफेद नंबर प्लेट लगाने से ये वाहन निजी गाड़ियों जैसे दिखाई देते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इससे सड़क पर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और सड़क सुरक्षा पर भी खतरा पैदा होता है। नियमों की अनदेखी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 के तहत ऐसे मामलों में भारी जुर्माने और बार-बार उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। बावजूद इसके, उत्तराखंड और विशेष रूप से हल्द्वानी में कई सरकारी विभागों और अधिकारियों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।








