उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार धीमी, प्रदेश में पहुंचने में हो सकती है देरी; ऊंचाई वाले जिलों में बारिश जारी

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं और पर्वतीय जिलों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है, लेकिन मैदानी और तराई क्षेत्रों में अभी तक बारिश ने जोर नहीं पकड़ा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से इस बार उत्तराखंड में मानसून के आगमन में कुछ दिनों की देरी हो सकती है।
प्रदेश में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि 20 जून मानी जाती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसके निर्धारित समय से थोड़ा विलंब होने की संभावना जताई जा रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की शुरुआत इस वर्ष सामान्य समय के आसपास हुई थी। अंडमान-निकोबार में यह सामान्य से छह दिन पहले सक्रिय हो गया था, जबकि केरल तट पर तीन दिन की देरी से 4 जून को पहुंचा। अरब सागर शाखा ने शुरुआत में अच्छी गति दिखाई और महाराष्ट्र-कर्नाटक तक समय पर पहुंच गई, लेकिन 8 जून के बाद इसकी प्रगति लगभग थम गई।
वहीं बंगाल की खाड़ी वाली शाखा भी चार-पांच दिन की देरी से आगे बढ़ी। 15 जून तक इसने आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों को कवर किया है। उत्तराखंड पहुंचने से पहले मानसून को झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से गुजरना होता है।
कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनने से अटका मानसून
स्काईमेट के मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनने के कारण मानसून की गति प्रभावित हुई है। सामान्यतः कम दबाव का क्षेत्र बनने पर मानसून को उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है, लेकिन फिलहाल ऐसी परिस्थितियां विकसित नहीं हो पा रही हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि ऊपरी वायुमंडल में हवाओं के असामान्य पैटर्न के कारण भी मानसून कमजोर पड़ा है। पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावित हो रही हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त नमी होने के बावजूद बादलों का पर्याप्त विकास नहीं हो पा रहा है।
अगले कुछ दिन कैसा रहेगा मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार अगले दो से तीन दिनों तक बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत गढ़वाल मंडल के ऊंचाई वाले जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा। उन्होंने बताया कि 18 जून से सक्रिय होने वाला नया पश्चिमी विक्षोभ मौसम में कुछ बदलाव ला सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसूनी बारिश खेती, भूजल स्तर में सुधार और गर्मी से राहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रदेश के लोग मानसून के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।








